डिजिटल मीडिया लोकतंत्र की मजबूत आवाज, स्वतंत्र पत्रकारिता के अधिकारों को कमतर आंकना गलत: एडवोकेट धनेश सिंह

It is not right to keep portal journalism under suspicion, impartial journalism should be respected and protected – Dhanesh Kumar Singh

कोरबा। डिजिटल और पोर्टल पत्रकारिता के संबंध में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने कहा कि आज के दौर में पोर्टल न्यूज और डिजिटल मीडिया लोकतंत्र की महत्वपूर्ण आवाज बन चुके हैं। इनके माध्यम से आम जनता की समस्याएं, प्रशासनिक खामियां, भ्रष्टाचार और जनहित से जुड़े मुद्दे समाज एवं शासन-प्रशासन तक पहुंचते हैं।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के नाम पर अवैध वसूली, धमकी अथवा भयादोहन करने वाले किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन कुछ व्यक्तियों के कृत्यों के आधार पर पूरे पोर्टल न्यूज और डिजिटल पत्रकारिता जगत को संदेह की दृष्टि से देखना उचित नहीं है।

शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने कहा कि पोर्टल पत्रकारिता भी पत्रकारिता का ही एक महत्वपूर्ण माध्यम है। केवल इसलिए कि कोई पत्रकार किसी बड़े समाचार पत्र या टीवी चैनल से जुड़ा नहीं है, उसकी पत्रकारिता और उसके अधिकारों को कमतर नहीं आंका जा सकता। अनेक स्वतंत्र एवं पोर्टल पत्रकार सीमित संसाधनों में रहकर जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं।

उन्होंने विशेष रूप से कहा कि भारत में स्वतंत्र पत्रकारिता करने के लिए किसी प्रेस क्लब या पत्रकार संगठन की सदस्यता लेना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। इसी संवैधानिक भावना के तहत व्यक्ति स्वतंत्र रूप से लेखन, रिपोर्टिंग, ब्लॉग, यूट्यूब और न्यूज पोर्टल के माध्यम से अपनी बात समाज तक पहुंचा सकता है। प्रेस क्लब या पत्रकार संगठन की सदस्यता एक संगठनात्मक एवं व्यावहारिक विषय है, इसे पत्रकारिता करने की अनिवार्य कानूनी शर्त नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया की स्वतंत्रता और आलोचनात्मक पत्रकारिता का विशेष महत्व है। पत्रकारों को अपनी बात रखने, प्रशासन से सवाल पूछने और जनसमस्याओं को उजागर करने के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। किसी पत्रकार की वैध पत्रकारिता को केवल इसलिए नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि वह किसी प्रेस क्लब या संगठन का सदस्य नहीं है।

उन्होंने प्रशासन से अपेक्षा की कि किसी भी शिकायत पर निष्पक्ष जांच हो तथा दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। साथ ही वास्तविक और स्वतंत्र पोर्टल पत्रकारों को अनावश्यक दबाव, भय अथवा भेदभाव का सामना न करना पड़े।

अंत में शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता धनेश कुमार सिंह ने कहा कि पत्रकारिता की पहचान उसका माध्यम या किसी संगठन की सदस्यता नहीं, बल्कि उसकी निष्पक्षता, विश्वसनीयता, स्वतंत्रता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता होनी चाहिए। कानून सभी के लिए समान है और पत्रकारिता की स्वतंत्रता का सम्मान भी सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए।

जारीकर्ता : धनेश कुमार सिंह, अधिवक्ता, कोरबा।