बैंक से पैसे निकालने पहुंची बुजुर्ग महिला ने कलेक्टर से कहा – “ले ना, गिन दे कलेक्टर बाबू”, आत्मीय संवाद ने जीता दिल

An elderly woman who had come to withdraw money from the bank said to the collector, “Take it, count it, Collector Babu.” Her cordial conversation won hearts.

अंबिकापुर, 03 जून 2026  सरगुजा जिले के बतौली स्थित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक में उस समय एक भावुक और दिल छू लेने वाला दृश्य देखने को मिला, जब बैंक के औचक निरीक्षण पर पहुंचे कलेक्टर विलास भोसकर का सामना एक बुजुर्ग किसान महिला से हुआ। महिला ने बैंक से अपनी राशि निकालने के बाद सहजता और अपनत्व के साथ कलेक्टर से कहा, “ले ना, गिन दे कलेक्टर बाबू।” यह संवाद वहां मौजूद अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राहकों के चेहरे पर मुस्कान ले आया।

दरअसल, कलेक्टर विलास भोसकर जिले में बैंकिंग सेवाओं और किसानों को मिलने वाली सुविधाओं का जायजा लेने जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, बतौली पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बैंक परिसर में लगी कतार में खड़े ग्राहकों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानने का प्रयास किया। इसी दौरान उनकी मुलाकात बुजुर्ग किसान महिला फूलमनी से हुई।

कलेक्टर ने महिला से आत्मीयता से पूछा कि बैंक से पैसे निकालने में किसी प्रकार की परेशानी तो नहीं होती। इस पर महिला ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया कि अब बैंक में पैसा आसानी से मिल जाता है और पहले की तुलना में व्यवस्था बेहतर हो गई है। बातचीत के दौरान महिला ने बैंक से निकाली गई राशि कलेक्टर की ओर बढ़ाते हुए कहा, “ले ना, गिन दे कलेक्टर बाबू।”

महिला के इस भोलेपन और विश्वास से भरे अनुरोध ने वहां मौजूद सभी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। कलेक्टर भी महिला की बात सुनकर मुस्कुरा उठे और उन्होंने स्नेहपूर्वक महिला से बातचीत जारी रखी। कुछ देर के लिए बैंक का माहौल पूरी तरह मानवीय संवेदनाओं से भर गया।

कलेक्टर के इस दौरे का उद्देश्य बैंकिंग सेवाओं की वास्तविक स्थिति को समझना और यह सुनिश्चित करना था कि किसानों, महिलाओं और ग्रामीण उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बैंक अधिकारियों को ग्राहकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने और भुगतान प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाने के निर्देश भी दिए।

बुजुर्ग महिला और कलेक्टर के बीच हुआ यह आत्मीय संवाद अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों का कहना है कि प्रशासन और आम जनता के बीच इस तरह का सहज और मानवीय रिश्ता ही सुशासन की पहचान है। फूलमनी का कलेक्टर पर दिखा भरोसा इस बात का प्रतीक है कि प्रशासनिक अधिकारियों की संवेदनशीलता और जनता से सीधा संवाद लोगों के मन में विश्वास पैदा करता है।