स्वामी आत्मानंद स्कूल में दर्दनाक हादसा, जर्जर लोहे का गेट गिरने से 7 वर्षीय मासूम की मौत

Tragic accident at Swami Atmanand School: 7-year-old boy dies after dilapidated iron gate collapses

रायपुर, 13 सितम्बर 2026 । राजधानी रायपुर से लगे बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के सिमगा तहसील क्षेत्र के हथबंद गांव में शनिवार को एक दर्दनाक हादसे में 7 वर्षीय मासूम की मौत हो गई। स्वामी आत्मानंद स्कूल के मुख्य गेट के पास खेल रहे बच्चे के ऊपर अचानक भारी लोहे का गेट गिर गया। हादसे में बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है, वहीं पूरे गांव में शोक का माहौल है।

मृतक बच्चे की पहचान 7 वर्षीय शिवम यादव, पिता नन्हीं यादव, निवासी रतनपुर, बिलासपुर के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार शिवम अपने रिश्तेदारों के यहां हथबंद आया हुआ था। शनिवार को वह अन्य बच्चों के साथ स्कूल के मुख्य गेट के आसपास खेल रहा था। इसी दौरान स्कूल परिसर का भारी लोहे का गेट अचानक कमजोर पिलर से टूटकर नीचे गिर गया और शिवम उसकी चपेट में आ गया।

गेट गिरने की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग मौके पर पहुंचे। बच्चे को गेट के नीचे दबा देखकर वहां अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों और आसपास के लोगों ने तत्काल गेट हटाकर बच्चे को बाहर निकाला और उसे बचाने का प्रयास किया। हादसे में बच्चे को गंभीर चोटें आई थीं। काफी प्रयास के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

शिवम की मौत की खबर जैसे ही परिजनों तक पहुंची, घर में कोहराम मच गया। मासूम की मौत से परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिस बच्चे के लिए परिवार भविष्य के सपने संजो रहा था, उसकी अचानक मौत ने सभी को झकझोर दिया है

घटना के बाद स्कूल परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल का मुख्य लोहे का गेट और उसका पिलर लंबे समय से जर्जर स्थिति में था। ग्रामीणों के मुताबिक गेट की हालत को लेकर पहले भी चिंता जताई गई थी और इसकी मरम्मत कराने की मांग की गई थी। इसके बावजूद समय रहते गेट की मरम्मत या उसे हटाने की कार्रवाई नहीं की गई।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जर्जर गेट की समय रहते मरम्मत कर दी जाती या उसे सुरक्षित तरीके से हटा दिया जाता तो शायद यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था। घटना के बाद लोगों में स्कूल प्रबंधन और संबंधित जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी भी देखने को मिल रही है।

हादसे ने सरकारी स्कूलों में सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था की पोल खोल दी है। स्कूल परिसरों में बच्चों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, लेकिन यदि जर्जर गेट, दीवार, छज्जे या अन्य निर्माण लंबे समय तक बिना मरम्मत के पड़े रहें तो किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने हथबंद के साथ-साथ आसपास के सभी स्कूल परिसरों का सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने मांग की है कि हादसे की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि जांच में किसी अधिकारी, स्कूल प्रबंधन या संबंधित एजेंसी की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही स्कूल परिसर में मौजूद जर्जर निर्माणों को तत्काल दुरुस्त कराने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नियमित निरीक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

हथबंद में हुए इस हादसे ने अभिभावकों की चिंता भी बढ़ा दी है। स्कूल बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान माना जाता है, लेकिन जर्जर ढांचे की अनदेखी किसी परिवार की पूरी जिंदगी उजाड़ सकती है। 7 वर्षीय शिवम की मौत ने व्यवस्था के सामने यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर स्कूल परिसर में मौजूद खतरनाक और जर्जर निर्माणों की समय रहते पहचान कर उन्हें सुरक्षित क्यों नहीं किया गया।