नगर निगम में बढ़ा विवाद: महापौर और सभापति को नहीं मिला लोकार्पण कार्यक्रम का न्योता, सभापति ने छोड़ी कुर्सी, प्रभारी सचिव को नोटिस

The controversy escalated in the Municipal Corporation: the Mayor and the Chairman were not invited to the inauguration ceremony, the Chairman resigned, and a notice was issued to the Secretary in charge.

कोरबा, 09 जून 2026। नगर पालिक निगम कोरबा में आयोजित लोकार्पण कार्यक्रमों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासनिक कार्रवाई तक पहुंच गया है। 6 जून को नगर निगम द्वारा शहर के विभिन्न चौक-चौराहों के सौंदर्यीकरण कार्यों तथा इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के लिए स्थापित चार्जिंग सेंटर के लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। इन कार्यक्रमों में प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग एवं श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, लेकिन नगर निगम की प्रथम नागरिक महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत और निगम के सभापति नूतन सिंह ठाकुर को आमंत्रित नहीं किया गया।

इस घटनाक्रम को लेकर निगम के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में नाराजगी का माहौल बन गया। सभापति नूतन सिंह ठाकुर ने 7 जून को सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए इसे जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा बताया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने तक वे विरोध दर्ज कराते रहेंगे।

शनिवार और रविवार अवकाश होने के कारण सोमवार 8 जून को सभापति नूतन सिंह ठाकुर अपने निर्धारित विरोध कार्यक्रम के तहत निगम कार्यालय पहुंचे और अपनी कुर्सी पर बैठने के बजाय जमीन पर बैठकर ही कार्यालयीन कार्यों का संचालन किया। सभापति के इस कदम से नगर निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया और पूरे दिन इस मुद्दे की चर्चा होती रही।

मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम आयुक्त ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नगर निगम के प्रभारी सचिव रामेश्वर कंवर को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। नोटिस में पूछा गया है कि आखिर महापौर और सभापति जैसे महत्वपूर्ण निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को लोकार्पण कार्यक्रमों में आमंत्रित क्यों नहीं किया गया। आयुक्त ने प्रभारी सचिव से तीन दिवस के भीतर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

जारी नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि प्रस्तुत जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर हुई इस कार्रवाई को सभापति की नाराजगी के बाद उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

अब सबकी निगाहें प्रभारी सचिव के स्पष्टीकरण पर टिकी हुई हैं। साथ ही यह सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या सभापति नूतन सिंह ठाकुर नोटिस जारी होने के बाद अपना विरोध समाप्त करेंगे या फिर जवाब आने और संभावित कार्रवाई होने तक जमीन पर बैठकर ही कामकाज जारी रखेंगे।

राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे प्रशासनिक लापरवाही मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे सुनियोजित राजनीतिक उपेक्षा के रूप में देख रहे हैं। हालांकि वास्तविक स्थिति प्रभारी सचिव के जवाब और आगे की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

नगर निगम कोरबा में उपजे इस विवाद ने एक बार फिर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय तथा संवाद व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में इस मामले का क्या परिणाम निकलता है, इस पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों वर्गों की नजर बनी हुई है।