कोरबा में खाद वितरण पर कलेक्टर सख्त, जमाखोरी और कालाबाजारी करने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

Collector strict on fertilizer distribution in Korba, strict action will be taken against hoarders and black marketers.

कोरबा, 30 मई (वेदांत समाचार)। खरीफ सीजन 2026 को देखते हुए किसानों को रासायनिक उर्वरकों की समय पर और पारदर्शी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर कुणाल दुदावत ने सहकारी समिति प्रबंधकों और निजी उर्वरक विक्रेताओं की समीक्षा बैठक ली। बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि खाद वितरण में पूरी पारदर्शिता बरती जाए और शासन द्वारा निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक निर्धारित मूल्य पर उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कलेक्टर ने कहा कि जिले में खरीफ 2026 के लिए रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और किसानों को आवश्यकता अनुसार खाद उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग लगातार निगरानी कर रहा है। उन्होंने सहकारी समितियों और निजी विक्रेताओं को निर्देशित किया कि खाद वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखें और किसानों को निर्धारित मानकों के अनुसार ही उर्वरक उपलब्ध कराएं।

बैठक में कलेक्टर ने चेतावनी दी कि उर्वरकों के भंडारण, परिवहन और विक्रय में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। कृषि विभाग और जिला स्तरीय उर्वरक नियंत्रण दल द्वारा नियमित एवं आकस्मिक निरीक्षण किए जाएंगे। निरीक्षण के दौरान पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक और वास्तविक भंडार में अंतर, निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बिक्री, बिना लाइसेंस उर्वरक वितरण, अनुदान प्राप्त खाद का दुरुपयोग तथा अनुचित स्थानों पर भंडारण जैसी अनियमितताओं पर कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने सभी सहकारी समिति प्रबंधकों को निर्देश दिए कि वे पंजीकृत किसानों से संपर्क कर उन्हें अग्रिम खाद उठाव के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि खाद वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए। साथ ही खाद वितरण से जुड़ी शिकायतों की स्थिति उत्पन्न न हो, इसका विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए गए।

निजी उर्वरक विक्रेताओं को संबोधित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि उर्वरकों के विक्रय में शासन के सभी नियमों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए। किसी भी प्रकार की अवैध जमाखोरी, कालाबाजारी या अनियमितता पाए जाने पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने किसानों को निर्धारित मात्रा में ही खाद बेचने और कृषक पंजी का नियमित संधारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि निजी विक्रेता किसानों को उर्वरकों के साथ सूक्ष्म पोषक तत्व, बीज, कीटनाशक, रसायन या अन्य सामग्री खरीदने के लिए बाध्य नहीं करेंगे। टैगिंग या दबावपूर्वक बिक्री की शिकायत मिलने पर संबंधित विक्रेता का लाइसेंस निलंबित या निरस्त किया जा सकता है।

कलेक्टर ने निर्देश दिया कि सभी निजी उर्वरक विक्रेता अपने प्रतिष्ठानों में पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक और वास्तविक स्टॉक का नियमित मिलान करें, जिससे वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और किसी प्रकार की विसंगति उत्पन्न न हो।

खरीफ सीजन में खाद की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सहकारी समितियों को विशेष दिशा-निर्देश भी दिए गए। इसके तहत सीमांत किसानों को पिछले वर्ष वितरित यूरिया की 80 प्रतिशत और डीएपी की 60 प्रतिशत मात्रा एकमुश्त उपलब्ध कराने, लघु किसानों को यूरिया दो किश्तों में तथा बड़े किसानों को तीन किश्तों में उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

किसानों की सुविधा और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए जिला स्तर पर कंट्रोल रूम भी स्थापित किया गया है। कलेक्टर ने सभी सहकारी समितियों और संबंधित संस्थानों में कंट्रोल रूम के हेल्पलाइन नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को आवश्यक जानकारी और सहायता समय पर मिल सके।

इसके अलावा समितियों को धान खरीदी वर्ष 2025-26 के लिए पंजीकृत किसानों की यूआरडी सूची में शत-प्रतिशत आधार सीडिंग सुनिश्चित करने तथा गोदामों में उपलब्ध उर्वरकों की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में उप संचालक कृषि डी.पी.एस. कंवर, उप पंजीयक सहकारी संस्थान एम. मिंज, डीएमओ ऋतुराज देवांगन, सहायक नोडल सहकारी केंद्रीय बैंक मुकेश कुमार पटेल सहित जिले के सभी सहकारी समिति प्रबंधक, निजी खाद विक्रेता और संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।