बरामद मोबाइलों की कीमत लगभग ₹11.50 लाख।*
*पिछले 04 माह में 200 से अधिक मोबाइल उनके स्वामियों को लौटाए गए।
कोरबा 5 मई 2026/जिले में आम नागरिकों की सुरक्षा एवं विश्वास को मजबूत करने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक कोरबा सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में “सजग कोरबा, सतर्क कोरबा” अभियान के तहत साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा लगातार प्रभावी कार्यवाही की जा रही है।
इसी क्रम में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कोरबा श्री लखन पटले, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कटघोरा श्री नीतिश ठाकुर एवं नगर पुलिस अधीक्षक कोरबा श्री प्रतीक चतुर्वेदी के दिशा-निर्देशन तथा साइबर पुलिस थाना प्रभारी निरीक्षक ललित चंद्रा के मार्गदर्शन में साइबर सेल एवं साइबर पुलिस थाना कोरबा की टीम द्वारा CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल के माध्यम से गुम हुए मोबाइल फोनों की खोज कर उन्हें बरामद किया गया।

साइबर पुलिस थाना कोरबा एवं जिले के समस्त थाना/चौकी स्टाफ के संयुक्त प्रयास से विभिन्न जिलों एवं राज्यों से गुम मोबाइलों को ट्रेस कर बरामद किया गया। इस कार्यवाही में उप निरीक्षक अजय सोनवानी एवं साइबर टीम का विशेष योगदान रहा।
बरामद किए गए मोबाइल फोन विभिन्न कंपनियों जैसे Apple, Samsung, Oppo, Vivo, Redmi, Realme एवं OnePlus के हैं, जो अलग-अलग स्थानों पर गुम हो गए थे। तकनीकी सहायता एवं CEIR पोर्टल की मदद से इन्हें खोजकर उनके वास्तविक स्वामियों तक पहुंचाया गया।
आज साइबर पुलिस थाना कोरबा में आयोजित कार्यक्रम में कुल 75 गुम मोबाइल फोन उनके वास्तविक मालिकों को वापस सौंपे गए। बरामद मोबाइलों की कुल अनुमानित कीमत लगभग ₹11,50,000/- है। मोबाइल वापस मिलने पर नागरिकों के चेहरों पर खुशी और मुस्कान देखने को मिली। अपने खोए हुए मोबाइल वापस पाकर मोबाइल स्वामियों ने कोरबा police की कार्यवाही की सराहना करते हुए पुलिस अधिकारियों एवं साइबर टीम को धन्यवाद ज्ञापित किया। कई लोगों ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनका मोबाइल वापस मिल पाएगा, लेकिन कोरबा पुलिस के प्रयासों से उनका विश्वास और मजबूत हुआ है।

उल्लेखनीय है कि साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा पिछले 04 महीनों में 200 से अधिक गुम मोबाइल फोन ट्रैक कर उनके वास्तविक स्वामियों to वापस दिलाया जा चुका है। पूर्व में भी कोरबा पुलिस द्वारा इस प्रकार के विशेष अभियान चलाकर नागरिकों को उनके गुम मोबाइल लौटाए गए हैं।
कोरबा पुलिस की यह पहल आम जनता में सुरक्षा की भावना को बढ़ाने तथा पुलिस के प्रति विश्वास को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।









