गरीबी और संघर्षों के बीच मेहनत की मिसाल बना सूरज,पढ़िए आबकारी उप-निरीक्षक की सफल कहानी

Suraj became an example of hard work amidst poverty and struggles, read the success story of the Excise Sub-Inspector.

कोरबा 25 फरवरी 2026/ किसी में अगर प्रतिभा हो तो उसे सुविधा नहीं मिलने के बाद भी वह निखर कर सामने आ ही जाती है। ऐसी ही एक प्रतिभा कोरबा जिले के दर्री अयोध्यापुरी वार्ड क्रमांक 52 में कुछ ऐसा ही देखने को मिला है जहां छोटे से मजदूर सतीश यादव के बेटे सूरज यादव ने सीजीपीएससी एग्जाम क्रेक करके अपनी सफलता का डंका बजा दिया हैं,     

मिट्टी खपरा के घर में बीता जीवन माता-पिता ने अपने बेटे की सफलता की सीढ़ी तैयार की आज सूरज यादव के कंधे पर डबल स्टार है. यह स्टार इनके माता-पिता और दादी के संघर्ष का तोहफा है.

आबकारी विभाग में सब इंस्पेक्टर बने सूरज: सूरज यादव   छत्तीसगढ़ सीजीपीएससी 2024 में पूरे छत्तीसगढ़ में 87वाँ रैंक प्राप्त कर आबकारी विभाग में सब इंस्पेक्टर हैं. पहली पोस्टिंग,29 जनवरी 2026 कोरिया जिले में मिली है सूरज की सफलता से माता-पिता काफी खुश हैं

उनकी जुबानी संघर्ष की कहानी
घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। पिता को कठिन परिश्रम करते देखा तो गरीबी दूर करने अधिकारी बनने का निश्चय बचपन से ही कर लिया था। गरीबी के कारण पढ़ाई में दिक्कतें आने पर मेरे सभी शिक्षकों ने भरपूर मदद की और आगे बढऩे के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया। प्रारंभिक शिक्षा अयोध्यापुरी के ही शासकीय स्कूल में हुई, कक्षा 11वी और 12वी के लिए विद्युत गृह उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 2 दर्री में पूरा हुआ। मैंने अपना स्नातक की उपाधि  गवर्नमेंट ईवीपीजी कॉलेज कोरबा से BSC (maths) में 2020 में प्राप्त किया।

पारिवारिक पृष्ठभूमि:– मेरी दादी (राही यादव) घर-घर जाकर  झाडू पोंछा बर्तन धोने के काम करती थी मेरे पिता डेली वेजेस पर काम करने वाले मजदूर रहे

प्रेरणा मुख्यतः मेरी माता ही रही हैं। उन्होंने मेरे बचपन से ही उस माहौल में मेरे पढ़ाई पर ध्यान दिया जहां पढ़ाई असंभव था। हर विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने हमेशा हमारे भाई बहन के पढ़ाई आगे रखा। अपनी जरूर किस चीज नहीं ले कर  हमारे पढ़ाई में लगाई  बाकी की चीज़ों को उन्होंने बहुत अच्छे से संभाला मेरी CGPSC की यात्रा ग्रेजुएशन के बाद 2020 से ग्रेजुएशन के बाद शुरू हुआ। मैंने कोरोना समय 2021 में ऑनलाइन कोर्स लिया था हालांकि कुछ कारणों उसे पढ़ नहीं पाया। उस समय मन भी वैसा नहीं हुआ की पढ़ लूं। सीजीपीएससी  2021 मेरा पहला अटेंप्ट था। मेरा प्रीलिम्स ही क्लीयर नहीं हुआ।

उसके बाद जिला प्रशासन कोरबा ने निःशुल्क कोचिंग संस्थान की शुरुआत की जिसमें मेरा सिलेक्शन हो गया था। मैंने वहां जाकर लगातार टेस्ट दिया। जिससे सीजीपीएससी 2022 और 2023 में मेरा प्रीलिम्स क्लियर हो गया लेकिन मैंस क्लियर नहीं हो पाया। 2023 में मैंस क्लियर नहीं होना मेरे लिए बहुत बड़ा सेटबैक था। क्योंकि इस बार मैंने ख़ुद को पूरा झोंक दिया था। हमारे समय परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत नहीं थी तीन वर प्रयास करने के बाद भी  फेल होना दबाव और तनाव भरा रहा। इसके बाद मैंने व्यापम के भी एग्जाम्स गंभीरता से दिलाना शुरू किया। वनडे एग्जाम्स में पकड़ अच्छी हो गई थी इसी के फलस्वरूप हॉस्टल सुप्रिटेंडेंट के एग्जाम में 142(0.02 मार्क्स से सिलेक्शन चुका), मंडी बोर्ड सचिव के एग्जाम में लगभग 300 रैंक था। हालांकि दोनों में सिलेक्शन नहीं हुआ। घर की ज़िम्मेदारी मेरे छोटे भाई सागर ने उठाई।2022–23 से उसने ट्यूशन पढ़ना शुरू किया इससे मेरे ऊपर जो रोज़गार का दबाव था वह बहुत हद तक कम हुआ। 2025 के आते आते मुझे लगने लगा की जॉब करना ही पड़ेगा। इसी दबाव के साथ CGPSC 2024 का प्रीलिम्स दिया क्लियर हुआ, मैंस दिया, यह पिछले 2 attempts से मेरे गले की हड्डी थी, जून में मैंस के बाद मैंने कितने नंबर आ जायेंगे/क्या स्तर था आदि का एनालिसिस ही नहीं किया और रिज़ल्ट का इंतज़ार करने लगा। इसी बीच अयोध्यापुरी के ही मिडिल स्कूल में मानदेय शिक्षक के लिए अप्लाई कर दिया। साथ ही साथ मिड 2025 में उच्च शिक्षा विभाग में प्रयोगशाला परिचारक और आबकारी आरक्षक के लिए व्यापम में एग्जाम भी दिलाया जो कि अच्छा गया था। मानदेय शिक्षक के लिए बुलावा आया मैंने ज्वाइन नहीं किया, क्योंकि व्यापम में हो जायेगा ऐसी उम्मीद थी। व्यापम के एग्जाम्स का रिज़ल्ट आया पहले प्रयोगशाला परिचारक में 42 और दूसरे ही दिन आबकारी आरक्षक में 44वाँ रैंक आया। दोनों सरकारी जॉब में सिलेक्शन निश्चित था। घर में खुशी का माहौल था।लेकिन मुझे मैंस के रिज़ल्ट का इंतजार था। मैंस का रिज़ल्ट भी अक्टूबर के अंत में आया और मेरा पहली बार मैंस भी क्लियर हुआ था। 10–15 दिन बाद ही इंटरव्यू था। 20 नवम्बर 2025 को Cgpsc 2024 का मेरिट लिस्ट आया जिसमें 87वे नंबर पर मेरा नाम और डेट ऑफ़ बर्थ था। सिलेक्शन इसमें भी फिक्स था लेकिन कौन सा पोस्ट मिला है यह अगले दिन 21 नवंबर को पता चला। मुझे आबकारी उपनिरीक्षक का पोस्ट अलॉट हुआ। घर में खुशी का माहौल था। वर्षो के संघर्ष का अंत हुआ था सबके आंखो में खुशी के आंसू थे। मेरी मां के दृश्य/अदृश्य सभी संघर्षों का अंत था। उनके वर्षों के त्यागों का परिणाम 20 नवंबर को देर से लेकिन बहुत सुसज्जित से मिला।मैंने लगभग पूरी तैयारी सेल्फ स्टडी और कुछ गुरुजनों के मार्गदर्शन से किया। टेलीग्राम एप में पूर्व में चयनित अधिकारियों से सतत जुड़ाव रहा जो काफ़ी फायदेमंद रहा।