मुंबई । नेटफ्लिक्स की अपकमिंग फिल्म घूसखोर पंडत को लेकर चल रहा विवाद अब खत्म हो गया है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद मामले का निपटारा कर दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब इस मामले में न तो कोई सिविल और न ही आपराधिक केस दर्ज होगा।
क्या था पूरा विवाद?
हाल ही में Netflix ने फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का अनाउंसमेंट टीजर जारी किया था। फिल्म में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस इंस्पेक्टर के किरदार में नजर आने वाले थे। फिल्म के टाइटल और किरदार के नाम को लेकर ब्राह्मण समुदाय के कुछ संगठनों ने आपत्ति जताई। विरोध प्रदर्शन सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक पहुंचे और मामला अदालत तक जा पहुंचा।
नीरज पांडे ने कोर्ट में रखा पक्ष
सुनवाई के दौरान फिल्म के निर्माता-निर्देशक नीरज पांडे ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा, “यह एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा फिल्म है, जिसका किसी धर्म या समुदाय को ठेस पहुंचाने से कोई संबंध नहीं है। मेरा कभी किसी की भावनाएं आहत करने का इरादा नहीं था।” उन्होंने यह भी बताया कि फिल्म का विवादित शीर्षक वापस ले लिया गया है। साथ ही टीजर, पोस्टर और अन्य प्रमोशनल कंटेंट को भी सभी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है।
कोर्ट का फैसला
नीरज पांडे की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं होगी। दायर याचिका का निपटारा करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि न तो सिविल और न ही आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा। इसके साथ ही यह विवाद पूरी तरह समाप्त हो गया।
पहले मांगी जा चुकी थी माफी
विवाद बढ़ने के बाद नेटफ्लिक्स ने टीजर पहले ही हटा लिया था। वहीं मनोज बाजपेयी और नीरज पांडे ने सार्वजनिक रूप से लोगों से माफी भी मांगी थी। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ‘घूसखोर पंडत’ विवाद पर आधिकारिक रूप से विराम लग गया है, और मेकर्स आगे की रणनीति पर विचार कर रहे हैं।







