जांजगीर-चांपा/रोहदी/ कहते हैं कि यदि शिक्षक ठान ले, तो एक साधारण से दिखने वाले सरकारी स्कूल की सूरत और सीरत दोनों बदली जा सकती है। इसे सच कर दिखाया है राज्यपाल पुरस्कार (राज्य शिक्षक सम्मान) से सम्मानित शिक्षक गुलजार बरेठ ने। साल 2005 से शासकीय प्राथमिक शाला अमोदी में 20 वर्षों की स्वर्णिम और बेमिसाल सेवा देने के बाद, वर्ष 2025 में पदोन्नत होकर वे शासकीय नवीन प्राथमिक शाला रोहदी में प्रधान पाठक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। गुलजार बरेठ ने प्राथमिक स्तर को बच्चों के भविष्य की मजबूत नींव मानते हुए, पारंपरिक रटने की पद्धति को पूरी तरह दरकिनार कर नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत खेल-खेल में सीखने पर विशेष जोर दिया है।
अनोखे नवाचारों से बदली स्कूल की तस्वीर, राज्य स्तर पर मिली पहचान
प्रधान पाठक गुलजार बरेठ ने स्कूल में ‘ध्वनि जागरूकता’ और ‘डिकोडिंग’ जैसी आधुनिक बाल-केंद्रित पद्धतियों का सफल प्रयोग किया है। उनके द्वारा कक्षा पहली के बच्चों में पठन कौशल विकास के लिए चलाया जा रहा स्वस्फूर्त कार्यक्रम ’20 दिन 20 कहानियाँ’ पिछले चार वर्षों से बेहद सफल रहा है, जिसे राज्य स्तर पर अकादमिक सहयोग हेतु ‘चर्चा-पत्र’ में भी शामिल किया गया है। इसके अलावा उन्होंने गणित शिक्षण की ELPS तकनीक, गणित किट, ‘नकली बाजार’ और ‘बाल बचत बैंक’ जैसे व्यावहारिक प्रयोगों से बच्चों के मन से गणित का डर दूर किया है। उनके इन नवाचारों को स्कूल शिक्षा विभाग के पूर्व प्रमुख सचिव आलोक शुक्ला एवं पूर्व संयुक्त संचालक एम. सुधीश द्वारा अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया पर सराहना के साथ साझा किया जा चुका है।
राष्ट्रीय स्तर पर लहराया स्कूल के बच्चों का परचम
गुलजार बरेठ के मार्गदर्शन का ही नतीजा है कि सरकारी स्कूल के बच्चों ने अंग्रेजी साक्षरता की ‘वर्ड पावर चैंपियनशिप’ में लगातार दो वर्ष तक राज्य में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। इनमें से बच्चों ने पहले वर्ष राज्य में तीसरा और अगले वर्ष राज्य में पहला (स्टेट चैंपियन) स्थान हासिल कर राष्ट्रीय स्तर (मुंबई) में पांचवां स्थान प्राप्त किया। इसके साथ ही जिला प्रशासन की अभिनव पहल ‘बोलेगा बचपन’ प्रतियोगिता की दो-दो विधाओं में उनके स्कूल के दो-दो बच्चे प्रथम आए, जिन्हें कलेक्टर द्वारा सम्मानित किया गया। उनके स्कूल से हर वर्ष बच्चों का चयन नवोदय और एकलव्य जैसी प्रतिष्ठित प्रवेश परीक्षाओं में हो रहा है।
साहित्यिक रचनाकार और अनुसंधानकर्ता भी हैं गुलजार बरेठ
शिक्षण के साथ-साथ गुलजार बरेठ साहित्य जगत में भी बेहद सक्रिय हैं। उन्होंने बच्चों के लिए सरल और रोचक भाषा में आम, केला, अंगूर, शेर, मकड़ी, चींटी जैसी दर्जनों एफएलएन आधारित बाल कविताएँ, कहानियां और ‘सांझ’ व ‘जीवन दर्शन’ जैसी गंभीर रचनाएँ लिखी हैं। छत्तीसगढ़ी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने ‘आवा जाड़ भगाबो जी’ और ‘बेंदरा पीला’ जैसी छत्तीसगढ़ी कविताओं की भी रचना की है। इसके अलावा, उन्होंने एससीईआरटी (SCERT) में गणित और अंग्रेजी पर क्रियात्मक अनुसंधान (Action Research) प्रस्तुत किया है और ‘आपदा प्रबंधन’ की पुस्तक में ‘शीत एवं ग्रीष्म लहर’ पर तथा ‘अंतर्दृष्टि वामा’ पुस्तक में संत गाडगे बाबा पर शोध आलेख लिखे हैं।
पुरस्कारों और उपाधियों से सजे हैं गुलजार बरेठ के कदम
अपनी इसी असाधारण कर्तव्यनिष्ठा और उत्कृष्ट कार्यों के लिए गुलजार बरेठ को राजभवन, रायपुर में राज्यपाल पुरस्कार (राज्य शिक्षक सम्मान) से नवाजा जा चुका है। इसके अतिरिक्त उन्हें मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण के तहत ‘शिक्षादूत पुरस्कार’, जिला प्रशासन द्वारा ‘शिक्षा रत्न सम्मान’, बीईओ-बीआरसी द्वारा ‘श्रेष्ठ शिक्षक सम्मान’ और स्वतंत्रता दिवस पर उत्कृष्ट शिक्षक सम्मान मिल चुका है। बेहतरीन गतिविधियों और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए उन्हें राज्य स्तर पर दो बार ‘OUR HERO’ (हमारे नायक) का खिताब भी दिया गया है। कक्षा पहली में 100% बुनियादी साक्षरता लक्ष्य हासिल करने पर उन्हें ‘FLN वॉरियर्स’ सम्मान से भी नवाजा गया है। आज उनका स्कूल न केवल बच्चों के लिए बल्कि अन्य शिक्षकों के लिए भी एक आदर्श ‘सीखने-सिखाने का केंद्र’ बन चुका है।







