सिंघीतराई,21 अप्रैल 2026। सक्ती जिले के ग्राम सिंघीतराई स्थित वेदांता के पावर प्लांट में हुई दुर्घटना के बाद अनेक यक्ष प्रश्न लोगों के जे़हन में कौंध रहे हैं। बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रचालन से जुड़ी जिम्मेदारियों की बारीकी से पड़ताल होगी? ऐसे में एनजीएसएल पर किस तरह की जिम्मेदारियां तय होंगी।
सूत्र बताते हैं कि संयंत्र का प्रचालन और रखरखाव एनजीएसएल द्वारा द्वारा किया जा रहा था। एनजीएसएल कंपनी का गठन एनटीपीसी लिमिटेड और जीई पावर सिस्टम्स की भागीदारी से हुआ है। दोनों ही दिग्गज कंपनियों का शेयर एनजीएसएल में 50-50 फीसदी का है। वेदांता के सिंघीतराई विद्युत संयंत्र में प्रचालन और रखरखाव का काम यही एनजीएसएल दीर्घकालिक अनुबंध व्यवस्था के तहत कर रही है। हाल ही में हुए हादसे से तकरीबन 11 महीने पहले एनजीएसएल ने अपने एक लिंक्डइन पोस्ट में घोषणा की थी कि सिंघीतराई के 2 गुणा 600 मेगावॉट छत्तीसगढ़ थर्मल पावर प्लांट की यूनिट-1 के प्रचालन एवं रखरखाव का एक दीर्घकालिक अनुबंध उसे मिला है। इसी यूनिट-1 के प्रचालन में बड़ा दुःखद हादसा हुआ जिसमें कई लोगों को असमय ही जान गंवानी पड़ी।
ऐसे ही कुछ दावे एनजीएसएल के वेबसाइट पर देखने को मिले हैं। इसमें एनजीएसल ने बताया है कि वेदांता के सिंघीतराई विद्युत संयंत्र में वह विभिन्न सेवाएं मुहैया कराएगा। इन सेवाओं के दायरे में यूनिट-1 के प्रचालन एवं अनुरक्षण से संबंधित सभी तकनीकी दायित्व तो शामिल होंगे ही, बॉयलर टर्बाइन जेनरेटर (बीटीजी), कोल हैंडलिंग प्लांट (सीएचपी), ऐश हैंडलिंग प्लांट (एएचपी), और प्लांट के अन्य हिस्से (बीओपी) जैसी मुख्य प्रणालियांे का रखरखाव भी शामिल है। इसके साथ ही संयंत्र का चौबीसों घंटे प्रचालन, समयबद्ध और स्थिति-आधारित रखरखाव, तथा प्रचालन की विश्वसनीयता और वैधानिक नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी एनजीएसएल प्रदत्त सेवाओं के दायरे में शामिल है।
ऐसे में ध्यान रखने वाली बात यह है कि संयंत्र का मालिकाना हक वेदांता लिमिटेड का है परंतु रोजमर्रा के प्रचालन और रखरखाव की जिम्मेदारियां ओएंडएम अनुबंध के तहत एनजीएसएल के निर्धारित दायरे में आती हैं। अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट में जिस बॉयलर में किसी बड़ी तकनीकी चूक की आशंकाएं जताई गई हैं उसकी पूरी जिम्मेदारी ओएंडएम अनुबंध के अंतर्गत प्रथम दृष्टया एनजीएसएल की ही देखी जा रही है। दुर्घटना के कारणों की जांच तकनीकी विशेषज्ञ कर रहे हैं। ऐसे में यह जरूरी है कि जवाबदेही का आंकलन निर्धारित भूमिकाओं और अनुबंध संबंधी जिम्मेदारियों के अनुरूप ही हो।
क्योंकि हादसा बड़ा है ऐसे में जिम्मेदारियों को निर्धारित करने संबंधी प्रश्न भी बड़े हैं। एनजीएसएल में देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक उपक्रम एनटीपीसी लिमिटेड और निजी क्षेत्र की एक बड़ी कंपनी जीई पावर सिस्टम की हिस्सेदारी है ऐसे में यह पेचीदा ही होगा कि किसकी जवाबदेही किस हद तक तय हो। जबकि संयंत्र की पूरी मशीनरी ही एनजीएसएल के अधीन संचालित हो रही थी ऐसे में संयंत्र पर मालिकाना हक रखने वाले उपक्रम वेदांता लिमिटेड पर उंगलियां क्यों उठे? दुर्घटना के जांच दलों की निष्पक्षता इस बात से तय होगी कि वे अपनी तफ्तीश में कितनी पारदर्शिता बरतते हैं।







