
कोरबा, 22 सितम्बर। लोतलोता गांव की महिलाओं ने पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल से मुलाकात कर गांव में बंद पड़े राखड़ डैम को दोबारा उपयोग में लाने और पाइपलाइन बिछाकर राखड़ संग्रहण की तैयारी किए जाने की जानकारी दी। महिलाओं ने पूर्व में तटबंध टूटने से खेतों और आसपास के क्षेत्रों में राखड़ बहने की घटना का उल्लेख करते हुए दोबारा ऐसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका जताई। ग्रामीणों की शिकायत को पूर्व मंत्री अग्रवाल ने संवेदनशील मामला बताते हुए कलेक्टर को पत्र लिखकर राखड़ बांध के पुन: उपयोग की अनुमति और पर्यावरणीय शर्तों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
पूर्व मंत्री ने पत्र में कहा है कि लोतलोता राखड़ बांध को फिर से उपयोग में लाने की तैयारी की जा रही है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि इसके लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की आवश्यक सहमति प्राप्त हुई है या नहीं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषय में किसी प्रकार की जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए।
अग्रवाल ने एडीएम तथा एचटीपीपी कोरबा पश्चिम के मुख्य अभियंता से भी चर्चा कर लोतलोता राखड़ बांध की वर्तमान स्थिति और वहां चल रही गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए तथा राखड़ भंडारण से संबंधित सभी पर्यावरणीय और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने 23 जून को लोतलोता राखड़ बांध के पांड-ए के 22 हेक्टेयर क्षेत्र के अस्थायी उपयोग की अनुमति दी है। यह अनुमति विभिन्न शर्तों के अधीन है। अनुमति की शर्त क्रमांक 3 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति को अनिवार्य बताया गया है। इसमें यह भी प्रावधान है कि यदि बोर्ड की सहमति प्राप्त नहीं होती है तो मंडल द्वारा दी गई अस्थायी अनुमति स्वतः निरस्त मानी जाएगी।
पूर्व मंत्री अग्रवाल ने मांग की है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति, आवश्यक पर्यावरणीय अनुमति और सुरक्षा परीक्षण की स्थिति स्पष्ट होने तक पाइपलाइन बिछाने की गतिविधि आगे न बढ़ाई जाए। साथ ही राखड़ भंडारण से संबंधित गतिविधियों को भी सभी आवश्यक शर्तों की पूर्ति होने तक रोकने की मांग की गई है। मामले को लेकर ग्रामीणों में भी सुरक्षा और पर्यावरण को लेकर चिंता बनी हुई है।







