कोरबा में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल: ‘PV ऐप’ के विरोध में ठप हुआ गिरदावरी और किसान पंजीयन, धान खरीदी से पहले बढ़ीं शासन की मुश्किलें

Patwaris in Korba go on indefinite strike: Girdawari (land survey) and farmer registration stalled in protest against the 'PV app', increasing government difficulties ahead of paddy procurement.

कोरबा, 22 अक्टूबर। छत्तीसगढ़ राजस्व पटवारी संघ के आह्वान पर कोरबा जिले सहित प्रदेश भर में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल लगातार जारी है। ‘PV ऐप’ (फसल भौतिक सत्यापन ऐप) के उपयोग में आ रही व्यावहारिक और तकनीकी समस्याओं का समाधान न होने और प्रशासन द्वारा की जा रही दंडात्मक कार्रवाई के विरोध में पटवारी पूरी तरह काम बंद कर धरने पर बैठ गए हैं। इस आंदोलन के कारण जिले में डिजिटल क्रॉप सर्वे, गिरदावरी और आगामी धान खरीदी के लिए किसान पंजीयन का काम पूरी तरह से ठप हो गया है, जिससे प्रशासन और किसानों दोनों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

तकनीकी खामियों के बीच दंडात्मक कार्रवाई से बढ़ा आक्रोश
हड़ताली पटवारियों का कहना है कि वे डिजिटल कार्य के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ‘PV ऐप’ में नेटवर्क न मिलने, डेटा सिंक न होने और बार-बार एरर आने जैसी कई व्यावहारिक त्रुटियां हैं। इन कमियों को दूर करने के बजाय जिला प्रशासन द्वारा पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने, निलंबित करने और वेतन रोकने जैसी दमनकारी कार्रवाइयां की जा रही हैं। संघ ने इस एकतरफा कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए सभी निलंबन आदेशों को बिना शर्त वापस लेने की मांग की है।

धान खरीदी और आम जनता के कार्य बुरी तरह प्रभावित
15 नवंबर से राज्य में धान खरीदी शुरू होने वाली है, जिससे ठीक पहले पटवारियों की इस हड़ताल ने सरकार के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। गिरदावरी और रकबा सत्यापन न होने से किसान पंजीयन अटक गया है। इसके अलावा तहसील कार्यालयों में आम जनता के जरूरी काम जैसे जाति, निवास, आय प्रमाण पत्र, जमीनों का सीमांकन, नामांतरण और फौती कटवाने के मामले पूरी तरह पेंडिंग हो गए हैं, जिससे लोग रोजाना दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

मांगें पूरी होने तक उग्र आंदोलन की चेतावनी
पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वेतन विसंगति को दूर करने, समय पर पदोन्नति देने और ऐप की समस्याओं का निराकरण करने तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। उच्च अधिकारियों के साथ हाल ही में हुई वार्ता विफल रहने के बाद संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी न्यायोचित मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।