ऑपरेशन बाज: बिलासपुर पुलिस की बड़ी सफलता, दूसरे जिले का शातिर स्थायी वारंटी गिरफ्तार

Operation Baaz: Bilaspur Police's major success, vicious permanent warrantee from another district arrested

बिल्हा पुलिस ने एक हफ्ते के भीतर तामील किए 11 स्थायी वारंट; सड़क हादसे का आरोपी लीलाराम ध्रुव भेजा गया जेल

बिलासपुर/ बिलासपुर पुलिस द्वारा अपराधियों और लंबे समय से फरार वारंटियों के खिलाफ चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन बाज’ के तहत बिल्हा पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए दूसरे जिले (बलौदाबाजार) में छिपे एक शातिर स्थायी वारंटी को गिरफ्तार करने में कामयाबी हासिल की है। बिल्हा थाना पुलिस ने बीते एक हफ्ते के भीतर रिकॉर्ड 11 स्थायी वारंट तामील कराकर अपराधियों में खौफ पैदा कर दिया है।

वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर बनी टीम
मिली जानकारी के अनुसार, बिलासपुर पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (DIG/SSP) श्री रजनेश सिंह (IPS) द्वारा जिले के सभी थाना और चौकी प्रभारियों को ‘ऑपरेशन बाज’ के तहत फरार स्थायी वारंटियों की धरपकड़ के कड़े निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश के परिपालन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) श्रीमती मधुलिका सिंह और नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) चकरभाठा श्री राजेश जोशी के मार्गदर्शन में बिल्हा थाना प्रभारी द्वारा विशेष टीमों का गठन कर वारंटियों की तलाश की जा रही थी।

वेश बदलकर छिप रहा था सड़क हादसे का आरोपी
इसी दौरान पुलिस के सूचना तंत्र (मुखबिर) से पुख्ता जानकारी मिली कि सड़क दुर्घटना के एक पुराने मामले का मुख्य अभियुक्त लीलाराम ध्रुव (23 वर्ष), पिता जोहन सिंह ध्रुव, जो कि मूल रूप से ग्राम रमदईया, थाना बलौदाबाजार (जिला बलौदाबाजार) का निवासी है, पुलिस को चकमा देने के लिए काफी समय से लुक-छिपे रह रहा था। उसके खिलाफ ‘वारंट बी’ भी जारी था। पुलिस की टीम ने घेराबंदी कर आरोपी को धर दबोचा और आज 19 अक्टूबर 2026 को उसे माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया है।

इनकी रही सराहनीय भूमिका
बिल्हा पुलिस के मुताबिक, क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने और अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजने के लिए स्थायी वारंटियों की पतासाजी का यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। इस पूरी त्वरित कार्रवाई में बिल्हा थाना प्रभारी प्रशिक्षु उप निरीक्षक आकाश कुमार बंजारे, निरीक्षक तोपसिंह नवरंग

, आरक्षक (803) उपेन्द्र ठाकुर, आरक्षक (1431) अर्जुन जांगड़े और आरक्षक (1390) संतोष मरकाम का विशेष और सराहनीय योगदान रहा।