भाजपा जिला अध्यक्ष गोपाल मोदी, मंडल अध्यक्ष, पार्षदगण और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति से और भव्य हुआ आयोजन, सुंदरकांड-हनुमान चालीसा और दिव्य दरबार ने बांधा समां
कोरबा 1 अप्रैल 2026/ग्राम ढपढप में आयोजित भव्य हनुमंत कथा के चौथे दिन आस्था, श्रद्धा और भक्ति का ऐसा विराट दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। चौथे दिन कथा स्थल पर लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, वहीं इस पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम और भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे ने भी पहुंचकर श्रद्धापूर्वक कथा श्रवण किया। दोनों वरिष्ठ नेताओं की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक ऐतिहासिक, प्रभावशाली और चर्चित बना दिया।
कथा स्थल पर उनके साथ भाजपा जिला अध्यक्ष गोपाल मोदी, भाजपा संगठन के मंडल अध्यक्ष, पार्षदगण, बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, तथा आयोजन समिति के सभी सदस्य और सेवाभावी स्वयंसेवक भी उपस्थित रहे। पूरे आयोजन के दौरान सभी ने श्रद्धा, अनुशासन और समर्पण के साथ कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
चौथे दिन कथा स्थल बना आस्था का महासागर
चौथे दिन ढपढप का कथा स्थल किसी आस्था के महाकुंभ से कम नहीं दिखाई दिया। जहां तक नजर जाती, वहां तक श्रद्धालुओं की भीड़ ही दिखाई दे रही थी। महिलाएं, पुरुष, युवा, बुजुर्ग और बच्चे—सभी भक्ति भाव से कथा श्रवण करते नजर आए।
कथा पंडाल के भीतर और बाहर केवल जय श्रीराम, जय बजरंगबली और हनुमान जी महाराज की जय के उद्घोष गूंजते रहे।
श्रद्धालुओं के चेहरों पर भक्ति, विश्वास, उम्मीद और भावनात्मक जुड़ाव स्पष्ट दिखाई दे रहा था। चौथे दिन का आयोजन यह संदेश देता नजर आया कि यह कथा अब केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनआस्था और आध्यात्मिक चेतना का विराट केंद्र बन चुकी है।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम और सरोज पांडे की उपस्थिति बनी विशेष आकर्षण
चौथे दिन का सबसे विशेष और चर्चित पहलू रहा छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम और भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सरोज पांडे का कथा स्थल पर पहुंचना। दोनों वरिष्ठ नेताओं ने श्रद्धा भाव से हनुमंत कथा का श्रवण किया और आयोजन की भव्यता, अनुशासन तथा भक्तिमय वातावरण की सराहना की।
उनकी उपस्थिति से कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं और कार्यकर्ताओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। लोगों ने इसे धर्म, संस्कृति और सनातन परंपरा के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया।
गोपाल मोदी, मंडल अध्यक्ष, पार्षद और कार्यकर्ताओं की मजबूत भागीदारी
इस भव्य आयोजन में भाजपा जिला अध्यक्ष गोपाल मोदी भी श्रद्धा भाव के साथ उपस्थित रहे। उनके साथ भाजपा संगठन के सभी मंडल अध्यक्ष, पार्षदगण, तथा बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी कथा श्रवण करते नजर आए।
कार्यकर्ताओं की केवल उपस्थिति ही नहीं, बल्कि गंभीर सहभागिता, सेवाभाव और अनुशासित व्यवस्था भी आयोजन की बड़ी विशेषता रही।
इस कार्यक्रम के सभी कार्यकर्ता पूरे समर्पण के साथ आयोजन को सफल बनाने में जुटे रहे।
दिव्य दरबार में भावावेश और आस्था का अद्भुत संगम
चौथे दिन का सबसे बड़ा आकर्षण रहा दिव्य दरबार, जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दरबार के दौरान कई श्रद्धालु भावावेश में झूमते, रोते, कांपते, सिर झुकाते और प्रभु नाम का स्मरण करते दिखाई दिए।
कई लोगों की आंखों से आंसू बहते नजर आए, तो कई श्रद्धालु हाथ जोड़कर विनती करते और प्रभु भक्ति में पूरी तरह डूबे हुए दिखाई दिए।
कथा स्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार, यह दृश्य अत्यंत भावुक, रहस्यमय और आध्यात्मिक अनुभूति से भरा हुआ था। कई श्रद्धालुओं ने इसे हनुमान कृपा और दिव्य प्रभाव का अनुभव बताया।
पूरे परिसर में ऐसा वातावरण बन गया, जिसे देखकर हजारों लोग स्वयं भी भाव-विभोर हो उठे।
हनुमान चालीसा की गूंज से बदल गया पूरा माहौल
कार्यक्रम के अंतिम चरण में जब हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ शुरू हुआ, तब पूरा कथा स्थल एक स्वर में भक्ति की ध्वनि से गूंज उठा।
हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ “जय हनुमान ज्ञान गुण सागर…” का पाठ किया और पूरा वातावरण गंभीर, शांत, भक्तिमय और ऊर्जावान हो गया।
लोगों ने अनुभव किया कि हनुमान चालीसा की गूंज ने कथा स्थल पर उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के मन को भीतर तक छू लिया।
कई श्रद्धालु शांत होकर सिर झुकाकर बैठ गए, तो कई प्रभु स्मरण में पूरी तरह डूब गए।
सुंदरकांड पाठ ने रचा भक्ति का शिखर
दिव्य दरबार और हनुमान चालीसा के बाद हुए सुंदरकांड पाठ ने पूरे आयोजन को आध्यात्मिक चरम पर पहुंचा दिया।
श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा और एकाग्रता के साथ सुंदरकांड पाठ में शामिल हुए।
सुंदरकांड के दौरान पूरा कथा स्थल रामभक्ति और हनुमान भक्ति की धारा में बहता नजर आया।
ढपढप बना सनातन चेतना और आस्था का केंद्र
लगातार बढ़ती भीड़, प्रदेश के बड़े नेताओं की उपस्थिति, और दिव्य वातावरण ने यह सिद्ध कर दिया है कि ढपढप की हनुमंत कथा अब पूरे क्षेत्र की आस्था और सनातन चेतना का केंद्र बन चुकी है।
यह आयोजन न केवल धर्म और भक्ति का संदेश दे रहा है, बल्कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गौरव और जनसमर्पण की भी मिसाल बन रहा है।
संक्षेप में कहें तो —
ढपढप की पावन धरा पर चौथे दिन हनुमंत कथा ने ऐसा इतिहास रचा, जहां एक ओर लाखों श्रद्धालु भक्ति में डूबे, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के बड़े नेताओं ने पहुंचकर आस्था को नमन किया।








