रोडवा खुर्द मे धूम धाम से जलझूलनी एकादशी मनाया गया

Jaljhulani Ekadashi was celebrated with great pomp in Rodwa Khurd

योगेश पुरी गोस्वामी / संवाददाता

रोडवा खुर्द.  कल्याणपुर पंचायत समिति के ग्राम रोडवा खुर्द मे    प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी  भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जलझूलनी एकादशी  के रूप मे धूमधाम से मनाया गया 
ग्राम रोडवा खुर्द मे स्थित  ठाकुर जी के मंदिर से  मुख्य तालाब  तक भजन एवं गाजे बाजे के साथ भव्य  शोभायात्रा  निकाली गयी   एवं मंदिर एवं तालाब मे सम्पूर्ण विधि विधान से पूजा अर्चना कर उपस्थित समस्त भक्तो ने ठाकुर जी के जयकारे  लगा कर   जलझूलनी एकादशी का उत्सव मनाया 
उक्त  एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी, पद्मा एकादशी और डोल ग्यारस भी कहते हैं। इस बार जलझूलनी एकादशी का व्रत  रोडवा खुर्द ग्राम वासियो ने बड़ी संख्या मे रखा था  
मान्यता अनुसार इस एकदशी व्रत को दौरान भी भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना होती है। जल झूलनी एकादशी व्रत के दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की अर्चना की जाती है। धर्म ग्रंथों के मुताबिक परिवर्तिनी एकादशी या जलझूलनी एकादशी पर व्रत करने से वाजपेय यज्ञ का फल मिलता है और सभी प्रकार के पापों का नाश होता है। जो मनुष्य इस एकादशी को भगवान विष्णु के वामन रूप की पूजा करता है, उससे तीनों लोक  मे यश प्राप्त   होता हैं


जलझूलनी एकादशी का महत्व
स्कन्द पुराण के अनुसार चातुर्मास के दौरान जब श्री विष्णु योग निद्रा में जाते हैं, उसके बाद जलझूलनी एकादशी के दिन वह सोते हुए करवट बदलते हैं।  पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक इस एकादशी व्रत को करने से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है। कहते हैं भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं इस व्रत का माहात्म्य युधिष्ठिर को बताया है। इस दिन भगवान करवट लेते हैं, इसलिए इसको परिवर्तिनी एकादशी भी कहते हैं। मान्यता यह भी है को जो भक्त भाद्रपद शुक्ल एकादशी का व्रत और पूजन करते हैं, उन्हें ब्रह्मा, विष्णु सहित तीनों लोकों में पूजन का फल प्राप्त होता है 
प्राप्त जानकारी अनुसार घार्मिक  ग्राम रोडवा खुर्द मे
जलझूलनी एकादशी    व्रत को  बड़े उत्सव के जैसे मनाया जाता है एवं उक्त उत्सव मे रोडवा खुर्द के आसपास के कई ग्रामो के घर्म प्रेमी महिला पुरुष बड़ी संख्या शामिल होते है पूरा दिन उत्सव का मौहाल रहता है  उपस्थित महिलाये  भजन गा कर  पूरा दिन  भगवान का गुणगान करते है