एसईसीएल मुख्यालय से महाप्रबंधक भू-राजस्व ने पत्र लिख कर दावा किया है कि ग्राम जटराज से विस्थापित किए जाने वाले ग्रामीणों की बसाहट सर्वमंगला मंदिर से आगे डम्प क्रमांक 14 में जाने के लिए समतलीकरण का कार्य पूर्ण हो चुका है और बुनियादी सुविधाओं के निर्माण व विकास कार्य प्रगति पर हैं।
कोरबा 24 अगस्त (वेदांत समाचार)। एसईसीएल संचालित कुसमुण्डा विस्तार खदान परियोजना अंतर्गत प्रभावित हो रहे ग्राम जटराज के ग्रामीणों को पात्रतानुसार रोजगार के साथ ही उचित मुआवजा व आवश्यक समस्त बुनियादी सुविधाओं के साथ बसाहट दिए जाने के संबंध में एसईसीएल सीएमडी हरीश दुहन को कई बार पत्र लिखे गए। पत्रों के जबाव में बिलासपुर मुख्यालय से महाप्रबंधक भू-राजस्व द्वारा 2 अगस्त को पत्र लिखकर अवगत कराया गया कि ग्राम जटराज के भू-विस्थापितों को सर्वमंगला मंदिर से आगे डम्प क्रमांक 14 क्षेत्र में बसाहट दिए जाने की प्रक्रिया प्रगतिरत है। डम्प क्षेत्र का समतलीकरण का कार्य पूर्ण हो चुका है और सामुदायिक भवन, स्वास्थ्य केन्द्र, आंगनबाड़ी केन्द्र, गार्डन, खेल मैदान, सड़क, नाली, पानी आदि जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए निर्माण व विकास कार्य प्रगतिरत है।
इसी प्रकार महाप्रबंधक भू-राजस्व के पत्र में आगे जानकारी दी गई है कि सर्वमंगला नगर (दुरपा) में जिन भू-विस्थापितों को बसाहट दिया गया है वहां पर समस्त बुनियादी सुविधाओं का निर्माण एवं विकास करवाया जा चुका है। जबकि वास्तविकता यह है कि सर्वमंगला नगर के बसाहट वाले क्षेत्र में लगभग डेढ़ साल पहले जटराज से विस्थापित 54 परिवारों को बसाया गया था और वहां पर मात्र एक टूटी-फूटी कच्ची सड़क और आधी-अधूरी नाली के अलावा कुछ भी नहीं बनाया गया है। पत्र में जैसे कि दावा किया गया है, सामुदायिक भवन, आंगनबाड़ी केन्द, पंचायत भवन, मंदिर, खेल मैदान, स्कूल व स्वास्थ्य केन्द्र जैसा कुछ भी दिखाई नहीं पड़ता है। यदि ऐसा कुछ है तो प्रशासन स्वतः उसकी पड़ताल कर प्रमाणित करे और एसईसीएल प्रबंधन उसके फोटोग्राफ उपलब्ध कराए। जयसिंह अग्रवाल ने सीएमडी को लिखा है कि मुख्यालय से किसी सक्षम अधिकारी को मौका मुआयना के लिए नियुक्त किया जाए जिसके साथ वे स्वयं स्थल निरीक्षण के लिए जाएंगे ताकि जमीनी सच्चाई लोगों के सामने आ सके।
उक्त संबंधित बसाहट वाले क्षेत्र से दिनांक 17 अगस्त को लिए गए फोटोग्राफ सीएमडी को भेजते हुए पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने पत्र लिखकर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि एसईसीएल भ्रामक जानकारियां साझा करते हुए प्रबंधन के साथ ही प्रशासन व जनप्रतिनिधियों को भी गुमराह कर रहा है। ऐसी भ्रामक जानकारियों के आधार पर अंचल के नागरिकों में आक्रोश उत्पन्न होने का अंदेशा और इससे पनपने वाली किसी भी प्रकार की अप्र्रिय घटना के लिए प्रबंधन स्वंय जिम्मेदार होगा।







