जग्गी हत्याकांड :अमित जोगी को हाईकोर्ट का आदेश, 3 हफ्ते में करना होगा सरेंडर”

Jaggi murder case: High Court orders Amit Jogi to surrender within 3 weeks

बिलासपुर, 02 अप्रैल। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित और हाई-प्रोफाइल रामावतार जग्गी हत्याकांड में आज एक अहम कानूनी मोड़ सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया, जिससे प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है।

यह मामला 4 जून 2003 का है, जब एनसीपी नेता और कारोबारी रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था और इसे उस दौर की सबसे बड़ी राजनीतिक हत्याओं में गिना गया। मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से कुछ बाद में सरकारी गवाह बन गए। 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।

अमित जोगी को बरी किए जाने के फैसले को रामावतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने चुनौती दी थी। उन्होंने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया, जहां से इसे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को पुनः विचार के लिए भेजा गया। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अब सख्त रुख अपनाते हुए अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।

रामावतार जग्गी केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक प्रतिष्ठित कारोबारी भी थे। वे पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे और उनके साथ ही कांग्रेस छोड़कर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में शामिल हुए थे। शुक्ल ने उन्हें छत्तीसगढ़ में पार्टी का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया था।

इस हत्याकांड में कई प्रभावशाली व्यक्तियों और पुलिस विभाग से जुड़े लोगों को दोषी ठहराया जा चुका है। इनमें अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा सहित अन्य शामिल हैं।

हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अमित जोगी तय समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण करते हैं या आगे किसी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हैं। वहीं, इस फैसले ने एक बार फिर राज्य की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया को केंद्र में ला दिया है।