ईरान की धमकी से भारत को भी झटका, ऑपरेशन संकल्प से कैसे निकाल पाएंगे फंसे भारतीयों को

Iran's threat also shocks India: How will Operation Sankalp rescue stranded Indians?

दिल्ली। अमेरिका और ईरान युद्ध अपने चरम पर है। अब खबर है कि ईरान ने अहम जल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज या होर्मुज जल डमरू मध्य बंद कर दिया है। इतना ही नहीं, चेतावनी भी जारी की गई है कि अगर कोई जहाज यहां से गुजरा तो आग लगा दी जाएगी। खास बात है कि यह मार्ग भारत के लिए भी काफी अहम है और इसके बंद होने का असर पड़ सकता है। इधर, अमेरिका दावा कर रहा है कि अब तक उसने बड़ा हमला किया नहीं है। वहीं, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका से कोई बातचीत नहीं करेगा।

रॉयटर्स ने ईरानी मीडिया की रिपोर्ट्स के हवाले से बताया, IRGC यानी ईरान रिवॉल्युशनरी गार्ड्स के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोमवार को बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि गुजरने वाले किसी भी जहाज को आग के हवाले कर दिया जाएगा। शनिवार को मार्ग बंद करने के ऐलान के बाद ईरान की तरफ से दी गई यह सबसे बड़ी धमकी है। होर्मुज जलडमरू मध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है। इस मार्ग से वैश्विक तेल और गैस का लगभग 20 प्रतिशत प्रवाह होता है। इसे बंद करने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर परिणाम होंगे, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बाधित होगा और तेल की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी।

भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। यह तेल ज्यादातर होर्मुज से होकर गुजरता है। मार्ग बाधित होने पर भारत की ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर तुरंत असर पड़ेगा। तेल महंगा होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी, जिससे महंगाई और राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है। साथ ही आयात बिल बढ़ने से चालू खाते का घाटा भी बढ़ता है। भारत के ईरान, सऊदी अरब और यूएई के साथ महत्वपूर्ण संबंध हैं।

ऐसे में संतुलित कूटनीति और समुद्री सुरक्षा सहयोग भारत के लिए अहम है। यदि यहां तनाव बढ़ने और जहाजों पर पाबंदी लगती है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तुरंत उछाल आ जाएगा। इसका असर महंगाई, परिवहन लागत और वैश्विक शेयर बाजारों पर पड़ेगा। दुनिया के समुद्री रास्ते से होने वाले कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा एलएनजी इसी रास्ते से गुजरती है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और कतर जैसे प्रमुख ऊर्जा उत्पादक देश अपने निर्यात के लिए इस मार्ग पर निर्भर हैं।