गैंगरेप के चार दोषियों को 20-20 साल की सजा, रास्ते से किडनैप कर किया था गंदा काम, 18 माह पुराने केस में कोर्ट ने सुनाया फैसला

Four gang rape convicts sentenced to 20 years in prison each; they were kidnapped from the street and subjected to the depraved act; court pronounces verdict in 18-month-old case

अंबिकापुर में 20 अप्रैल 2024 की रात को हुई गैंगरेप की सनसनीखेज वारदात में बड़ा फैसला आया है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अतुल कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने सोमवार को चारों आरोपियों को दोषी पाते हुए सख्त सजा सुनाई। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के जघन्य अपराधों के लिए कठोर सजा ही समाज में संदेश दे सकती है।

मामला सीतापुर थाना क्षेत्र का है। पीड़िता ने रिपोर्ट में बताया था कि 20 अप्रैल की रात वह किसी काम से बाहर गई थी। इसी दौरान चार आरोपियों ने उसे रास्ते में रोक लिया। आरोपियों ने जबरन युवती को सुनसान जगह ले जाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना के बाद युवती ने हिम्मत दिखाते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई।

मामला सीतापुर थाना क्षेत्र का है। पीड़िता ने रिपोर्ट में बताया था कि 20 अप्रैल की रात वह किसी काम से बाहर गई थी। इसी दौरान चार आरोपियों ने उसे रास्ते में रोक लिया। आरोपियों ने जबरन युवती को सुनसान जगह ले जाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना के बाद युवती ने हिम्मत दिखाते हुए थाने में शिकायत दर्ज कराई।

आरोपियों के नाम और सजा

जिन चार आरोपियों को सजा सुनाई गई है, उनके नाम हैं –

  • जय कुमार यादव,पुरुषोत्तम यादव,नीरज अगरिया,अजय बसोड

अदालत ने इन चारों को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(D) (सामूहिक दुष्कर्म), 506 (धमकी) और अन्य प्रासंगिक धाराओं के तहत दोषी पाया। प्रत्येक आरोपी को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा और 50-50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

सजा सुनाते समय विशेष न्यायाधीश अतुल कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज के लिए कलंक हैं। पीड़िताओं को न्याय दिलाना न्यायालय की जिम्मेदारी है और ऐसे अपराधों में नरमी की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती। अदालत ने यह भी कहा कि इस सजा से समाज में एक कड़ा संदेश जाएगा कि महिलाओं की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों को कड़ी सजा मिलेगी।

अदालत ने मामले की जांच करने वाली पुलिस टीम की भी सराहना की, जिन्होंने समय रहते आरोपियों को गिरफ्तार कर चार्जशीट पेश की। इस मामले की सुनवाई को प्राथमिकता देते हुए अदालत ने कम समय में फैसला सुनाया।

फैसला आने के बाद पीड़िता के परिजनों ने राहत की सांस ली और अदालत के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन सभी पीड़ितों के लिए मिसाल है जो न्याय के लिए लड़ रहे हैं।