अगर आपका बच्चा भी छोटी-छोटी बातों पर जिद करता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए पेरेंट्स कुछ आसान उपाय अपना सकते हैं- जैसे बच्चे से खुलकर बातचीत करना, उसकी अच्छी आदतों की तारीफ करना और उसे समझने की कोशिश करना। ये छोटे-छोटे कदम बच्चे के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
बच्चे अक्सर अपनी बात मनवाने के लिए जिद करते हैं, लेकिन जब यह व्यवहार जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है, तो पेरेंट्स के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। कई बार इसके पीछे माता-पिता का गुस्सा, बच्चों से ज्यादा उम्मीदें, स्कूल से जुड़ी परेशानियां या अन्य कारण जिम्मेदार होते हैं।

आइए बच्चों में होने वाली बिहेवियर प्रॉब्लम को विस्तार से समझते हैं। साथ ही इसके पीछे छिपे कारणों को भी गहराई से जानतते हैं। इसके अलावा, यह भी समझने की कोशिश करेंगे कि ऐसी स्थिति में माता-पिता को क्या कदम उठाने चाहिए, ताकि वे बच्चों को सही दिशा दे सकें।
क्या होता है बिहेवियर प्रॉब्लम ?
चाइल्ड और Adolescent मेंटल हेल्थ सर्विस के अनुसार, सिर्फ बच्चे ही नहीं, बल्कि युवाओं की जिंदगी में भी ऐसा समय आता है जब वे बड़ों की उम्मीदों के अनुसार व्यवहार नहीं करते। यह उनके बड़े होने और आत्मनिर्भर बनने की प्रक्रिया का एक नेचुरल हिस्सा होता है।
लेकिन कभी-कभी यह बिहेवियर सामान्य से ज्यादा गंभीर हो सकता है, और इसका असर सिर्फ उनके जीवन पर ही नहीं, बल्कि उनके आस-पास के लोगों पर भी पड़ सकता है।
तब ब्रेन अलग तरीके से करता है रिएक्ट
हर इंसान जीवन की घटनाओं पर अलग-अलग प्रतिक्रिया देता है, और यही बात बच्चों और टीनएजर्स पर भी लागू होती है। डेवलपमेंट के अलग-अलग स्टेज में उनका दिमाग अलग तरीके से विकसित होता है, जिसकी वजह से वे कई बार ज्यादा स्ट्राॅन्ग इमोशन्स का अनुभव करते हैं।
दरअसल, जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, वे अपनी मर्जी से जीना चाहते हैं और उन्हें ज्यादा रोक-टोक पसंद नहीं होती। कई बार वे नियमों को तोड़ने की कोशिश भी करते हैं। इसी वजह से पेरेंट्स के लिए इस समय उन्हें संभालना काफी मुश्किल हो सकता है।
ये हो सकते हैं कारण
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार, बच्चों के व्यवहार में बदलाव या जिद के पीछे कई कारण हो सकते हैं। आइए इन्हें नीचे विस्तार से समझते हैं:
1 पेरेंट्स की ज्यादा उम्मीदें
जब पेरेंट्स बच्चों से उनकी क्षमता से ज्यादा या गलत उम्मीदें रखते हैं, तो बच्चे दबाव में आकर गलत व्यवहार कर सकते हैं।
2-बच्चे का स्वभाव
हर बच्चा अलग होता है, कुछ बच्चे स्वभाव से ज्यादा जिद्दी या संवेदनशील हो सकते हैं।
3-स्कूल से जुड़ी समस्याएं
पढ़ाई का दबाव, टीचर्स या दोस्तों के साथ परेशानी भी व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।
4- परिवार में तनाव
घर का माहौल तनावपूर्ण होने पर बच्चे भी चिड़चिड़े हो सकते हैं।

5-माता-पिता का गुस्सैल व्यवहार
अगर बच्चे के जिद करने पर पेरेंट्स आपा खो देते हैं या डांटने-फटकारने लगते हैं, तो इससे स्थिति और बिगड़ सकती है।
6: पेरेंट्स के झगड़े
घर में होने वाले विवाद बच्चों की मेंटल हेल्थ पर बुरा असर डाल सकते हैं।
पेरेंट्स इन बातों पर भी करें गौर
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की रिपोर्ट यह भी बताती है कि अगर आपका बच्चा बार-बार माता-पिता की बात नहीं मानता और यह व्यवहार लंबे समय से बना हुआ है, तो घर के माहौल और पारिवारिक स्थिति पर भी ध्यान देना बहुत जरूरी हो जाता है। इसे बेहतर तरीके से समझने के लिए नीचे कुछ अहम पॉइंट्स दिए गए हैं:
- आपके परिवार के सदस्य एक-दूसरे का सम्मान करते हैं?
- वे एक-दूसरे की प्राइवेसी, विचार और व्यक्तिगत मूल्य का सम्मान करते हैं?
- परिवार अपने झगड़ों को कैसे सुलझाता है?
- असहमति को तर्कसंगत बातचीत से सुलझाया जाता है, या अक्सर बहस और मार-पीट हो जाती है?
- आप अपने बच्चे के साथ आम तौर पर कैसा व्यवहार करते हैं और अनुशासन सिखाने के लिए कौन से तरीके अपनाते हैं?
- आप खुद कितनी बार बच्चे को चिल्लाते या मारते हैं?
- आपके और बच्चे के व्यक्तित्व और व्यवहार में बहुत फर्क है, जिससे मनमुटाव होता है?
- बच्चे को स्कूल में पढ़ाई या दोस्त बनाने में परेशानी हो रही है?
- परिवार किसी तनावपूर्ण दौर से गुजर रहा है?
माता-पिता आजमा सकते हैं ये 5 उपाय

1- खुलकर बातचीत करें:
अगर आपका बच्चा हाल ही में अनुशासनहीन या मनमानी करने लगा है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय समझने की कोशिश करें। उससे प्यार और शांति से बात करें और बताएं कि आपने उसके व्यवहार में बदलाव महसूस किया है। साथ ही, यह भी जताएं कि आप उसकी भावनाओं को समझना चाहते हैं। बच्चे की बात ध्यान से सुनें। साथ ही उसकी परेशानी या निराशा की असली वजह जानने की कोशिश करें। यही वह पहला और सबसे जरूरी कदम है, जो उसके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
2- रिएक्शन पर ध्यान दें:
अगर बच्चा किसी बात पर बहस कर रहा है और आपकी बात नहीं सुन रहा है, तो ऐसी स्थिति में आपका गुस्सा करना या आपा खो देना हालात को और बिगाड़ सकता है। ऐसा करने पर बच्चा और ज्यादा जिद्दी हो सकता है, बदतमीजी पर उतर सकता है। इसीलिए अपने रिएक्शन पर ध्यान दें।
ऐसी स्थिति में अगर माता-पिता खुद शांत रहते हैं और बच्चे को सपोर्ट करते हैं, तो इससे स्थिति संभल जाती है। जब आप अपने व्यवहार में स्थिरता बनाए रखते हैं, तो बच्चा भी धीरे-धीरे आपकी बात मानने लगता है। इसके अलावा, अगर आप बच्चे और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करते हैं, तो बच्चा भी वही सीखता है और वैसा ही व्यवहार करने लगता है।
3-मार-पीट बिल्कुल न करें
NHS UK के अनुसार, बच्चों के साथ मार-पीट कभी नहीं करनी चाहिए। थप्पड़ मारने से बच्चा उस समय के लिए रुक तो सकता है, लेकिन इससे उसके व्यवहार में कोई स्थायी सकारात्मक बदलाव नहीं आता।
दरअसल, बच्चे वही सीखते हैं जो वे देखते हैं। ऐसे में अगर आप गुस्से में आकर उन्हें मारते हैं, तो वे यही समझते हैं कि अपनी बात मनवाने के लिए मारना सही है। यही कारण है कि जिन बच्चों के साथ आक्रामक व्यवहार होता है, वे खुद भी आगे चलकर आक्रामक बन सकते हैं।
इसलिए बेहतर है कि आप हर स्थिति में शांत रहकर, समझदारी से बात करें और एक अच्छा उदाहरण पेश करें, क्योंकि आपका व्यवहार ही बच्चे की सबसे बड़ी सीख होता है।
4- अच्छी बातों की सरहाना करें
अक्सर जब बच्चा जिद या मनमानी करता है, तो ऐसी कंडीशन में पेरेंट्स कई बार उसकी अच्छी आदतों को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन बच्चे के अच्छे व्यवहार को पहचानना और उसकी तारीफ करना बहुत जरूरी है। उसे बताएं कि उसने क्या अच्छा किया और आप उससे कितना खुश हैं। आप उसे गले लगाकर, मुस्कुराकर या थोड़ा अतिरिक्त ध्यान देकर अपनी खुशी जाहिर कर सकते हैं। यह छोटा सा कदम बच्चे के व्यवहार में बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
5: निरंतरता बनाएं रखें

NHS UK के लेख में यह भी साफ तौर पर कहा गया है कि पेरेंट्स को यह समझना जरूरी है कि बच्चे के व्यवहार में बदलाव एक दिन में नहीं आता, इसमें समय लगता है। इसलिए अगर आप उसे सुधारने के लिए कुछ तरीके अपना रहे हैं, तो उन्हें लगातार जारी रखें। जरूरत पड़ने पर अपने साथी, दोस्तों, अन्य अभिभावकों या किसी एक्सपर्ट से सलाह लें। अपनी परेशानियों और अनुभवों को शेयर करना भी आपको बेहतर तरीके से स्थिति संभालने में मदद कर सकता है।
तब एक्सपर्ट की मदद जरूर लें
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के लेख में बताया गया है कि कुछ स्थितियों में एक्सपर्ट की मदद लेना जरूरी हो जाता है। अगर बच्चा घर और स्कूल दोनों जगह लंबे समय से बार-बार बात नहीं मान रहा है, या जिद और अनादर के साथ उसमें गुस्सा, मारपीट या चीजें तोड़ने की आदत भी दिखने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
इसी तरह, अगर बच्चा अक्सर उदास रहता है, अकेलापन महसूस करता है या खुद को नापसंद किया हुआ समझता है, या परिवार में कोई सदस्य तनाव से निपटने के लिए शराब या अन्य नशीले पदार्थों का सहारा ले रहा है, तो समय रहते एक्सपर्ट की मदद लेना बेहद जरूरी हो जाता है।









