खैरागढ़। छत्तीसगढ़ में महज 10 हजार रुपये के लिए एक युवक कागजों पर महिला बन गया। मामला खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले का है, जहां महतारी वंदन योजना में एक पुरुष द्वारा आवेदन कर 10 माह तक सहायता राशि लेने का मामला सामने आया है।महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए शुरू की गई महतारी वंदन योजना में ऐसा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने पूरे सत्यापन तंत्र की पोल खोल दी है. खुद को ही अपना पति बताया और हैरानी की बात यह है कि आंगनबाड़ी से लेकर सुपरवाइजर तक ने आवेदन को सही मानकर सत्यापित भी कर दिया. नतीजा 10 महीने तक सरकारी राशि खाते में पहुंचती रही और विभाग को इसकी भनक डेढ़ साल बाद लगी.
क्या है मामला ?
ग्राम मुढ़ीपार निवासी तिलोक साहू ने महतारी वंदन योजना में आवेदन किया. आवेदन में हितग्राही का नाम भी तिलोक साहू और पति का नाम भी तिलोक साहू ही दर्ज था. इसके बाद आवेदन पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और फिर सुपरवाइजर स्तर पर सत्यापित हो गया. इतना ही नहीं, अपात्र होने के बावजूद उसके खाते में लगातार 10 महीने तक योजना की राशि जमा होती रही.
आरोपित तिलोक साहू ने अपने नाम से आवेदन किया, जो महिला हितग्राही के रूप में स्वीकृत हो गया। इसके बाद मार्च से दिसंबर 2024 तक उसके खाते में हर माह एक-एक हजार रुपये जमा होते रहे।
ई-केवाईसी के दौरान मामला उजागर हुआ, जिसके बाद प्रशासन ने करीब दो साल बाद इसी माह लाभ की राशि की रिकवरी कराई। तिलोक का दावा है कि उसने केवल पोर्टल पर आवेदन प्रक्रिया समझने के लिए अपने नाम से आवेदन किया था, लेकिन आवेदन स्वीकृत हो गया। हालांकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और पर्यवेक्षक ने उसका सत्यापन कर दिया।








