कोरबा। शारदीय और चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी के पावन अवसर पर जिले के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध कोसगाई माता मंदिर (कोसगाईगढ़) में भक्तों का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। सुबह की पहली किरण के साथ ही माता रानी के दर्शन और मनौतियां मांगने के लिए दूर-दूर से हजारों श्रद्धालु पहाड़ी पर स्थित इस चमत्कारी दरबार में पहुँचने लगे। बीहड़ जंगलों और दुर्गम वादियों के बीच लगभग 600 फीट ऊंचे पहाड़ पर बसे माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र दिनभर गूंजता रहा।

श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास
दरबार में पहुँचे श्रद्धालु संतोष, कुलदीप सिंह गौतम पांडा का कहना है कि वह कई सालों से माता का दर्शन के लिए यहाँ आते रहे हैं। उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि पहाड़ की सीढ़ियों पर चढ़कर कठिनाई तो होती है, पर साक्षात माँ का दर्शन करने से थकावट दूर हो जाती है और मन पूरी तरह भक्तिमय व ऊर्जवान हो जाता है। उन्होंने बताया कि माता कोसगाई के प्रति क्षेत्र के लोगों की अगाध श्रद्धा है और यहाँ आने वाले हर सच्चे भक्त की मनोकामना अवश्य पूरी होती है।
खुले आसमान के नीचे विराजमान हैं माता
इस प्राचीन और चमत्कारी मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ कोई छत या गुंबद नहीं है। सदियों पुराने इस स्थल को लेकर लोक मान्यता है कि माता केवल नवरात्रि के समय ही पूर्ण रूप से मूर्ति स्वरूप में यहाँ विराजमान रहती हैं और उन्हें खुले वातावरण में रहना पसंद है। श्रद्धालु खुले आसमान के नीचे ही माता के दिव्य स्वरूप का दर्शन कर निहाल हो रहे हैं।
दुर्गम रास्ता भी नहीं डिगा पाया हौसला
घने जंगलों के बीच पहाड़ की चोटियों पर स्थित इस दरबार तक पहुँचने के लिए भक्तों को सैकड़ों कठिन सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। महाअष्टमी के दिन इस पूरे दुर्गम रास्ते में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं। बच्चे, बुजुर्ग और युवा सभी ‘जय माता दी’ के नारे लगाते हुए उत्साह के साथ चढ़ाई पूरी करते नजर आए। सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए समितियों के वॉलिंटियर्स मुस्तैद रहे।

मन्नत के नारियल से पटे पेड़
अपनी मनोकामनाएं पूरी करने के लिए भक्तों ने मंदिर परिसर में मौजूद पवित्र वृक्ष पर मन्नत के नारियल और मंगल धागे बांधकर सुख-समृद्धि की कामना की।







