खाद्य सचिव ने जारी किए कड़े निर्देश; कोचियों-बिचौलियों की सूची होगी तैयार, गाड़ी और धान होंगे जब्त
रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत 15 नवंबर 2026 से धान खरीदी महाअभियान शुरू होने जा रहा है। इस बार खरीदी व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और पड़ोसी राज्यों से आने वाले अवैध धान पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने बेहद सख्त कदम उठाए हैं। खाद्य सचिव रीना कंगाले ने सभी संभागायुक्तों, जिला कलेक्टरों और मार्कफेड के प्रबंध संचालक को इस संबंध में विस्तृत और कड़े दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
रकबा खपाने और रीसाइक्लिंग की आशंका पर नजर
प्रशासन को आशंका है कि बाहरी राज्यों से धान लाकर छत्तीसगढ़ के पंजीकृत किसानों के रकबे में अवैध रूप से बेचने का प्रयास किया जा सकता है। इसके अलावा, गांवों और शहरों में सक्रिय कोचिये-बिचौलिये भी छोटे स्तर पर धान खरीदकर किसानों के पंजीयन का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं, कुछ मिलरों और परिवहनकर्ताओं द्वारा धान के पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) यानी एक ही धान को बार-बार घुमाकर सरकारी व्यवस्था में खपाने की आशंका को देखते हुए भी विशेष निगरानी रखने को कहा गया है।
हर जिले में बनेगा ‘विशेष चेकिंग दल’
धान खरीदी में किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकने के लिए प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अगुवाई में एक विशेष संयुक्त चेकिंग दल का गठन किया जाएगा। इस खोजी दल में राजस्व, खाद्य, मंडी, सहकारिता, वन और परिवहन विभाग के अधिकारी शामिल होंगे। यह टीम औचक निरीक्षण करेगी और गड़बड़ी पाए जाने पर तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी।
273 चेक पोस्ट पर कड़ा पहरा, जरूरत पड़ने पर बढ़ेंगी संख्या
छत्तीसगढ़ की सीमाओं और आंतरिक मार्गों पर स्थापित 273 चेक पोस्ट पर सुरक्षा और जांच व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। सीमावर्ती जिलों के अधिकारियों को विशेष रूप से अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। खाद्य विभाग ने साफ किया है कि जरूरत पड़ने पर चेक पोस्ट की संख्या और बढ़ाई जा सकती है ताकि तस्करों को घेरा जा सके।
बिना अनुमति नहीं आएगा बाहरी धान; सुपर फाइन को मामूली छूट
विपणन वर्ष के दौरान (15 नवंबर 2026 से 30 अप्रैल 2027 तक) दूसरे राज्यों से धान का आयात करने के लिए संचालक, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति की लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। हालांकि, ₹3300 प्रति क्विंटल से अधिक लागत वाले ‘सुपर फाइन’ धान के आयात को इस अनुमति से छूट दी गई है, लेकिन ऐसे धान की आवक की सूचना भी संबंधित जिला खाद्य अधिकारी या खाद्य नियंत्रक को देना अनिवार्य रहेगा।
धान खरीदी से पहले ही नपेगे कोचिये
मंडी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि धान खरीदी शुरू होने से पहले ही स्थानीय स्तर पर सक्रिय कोचियों और बिचौलियों को चिन्हित कर उनकी सूची नजदीकी धान खरीदी समिति और खाद्य विभाग को सौंप दी जाए। यदि कोई भी बिचौलिया किसी किसान के नाम पर धान खपाता पकड़ा गया, तो उसका धान और वाहन तुरंत जब्त कर लिए जाएंगे। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि समर्थन मूल्य का सीधा लाभ केवल प्रदेश के वास्तविक और पंजीकृत किसानों को ही मिले।







