खैर लकड़ी तस्करी मामले में बड़ा खुलासा, आरोपी के घर से 81 लाख कैश बरामद…

Big revelation in Khair timber smuggling case, Rs 81 lakh cash recovered from accused's house...

सारंगढ़-बिलाईगढ़ में महासमुंद पुलिस की बड़ी कार्रवाई

सारंगढ़-बिलाईगढ़ , 09 सितंबर। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के मुड़पार गांव में कथित अवैध खैर लकड़ी परिवहन और फर्जी NOC के मामले में महासमुंद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने आरोपी मनीष अग्रवाल के मुड़पार स्थित मकान में विधिवत सर्च वारंट के आधार पर तलाशी ली। इस दौरान पुलिस को करीब 81 लाख रुपये की नगद रकम बरामद हुई है।

पुलिस के मुताबिक, मकान से 500-500 रुपये के नोटों की कुल 162 गड्डियां मिलीं। प्रत्येक गड्डी में 100 नोट होने के हिसाब से कुल 16,200 नोट बरामद किए गए, जिनकी कुल कीमत 81 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने नगद रकम को विधिवत जब्त कर लिया है।

23,350 किलो खैर लकड़ी के परिवहन में फर्जी NOC का आरोप
मामला पिथौरा वन परिक्षेत्राधिकारी के आवेदन के आधार पर दर्ज किया गया है। आरोप है कि करीब 23,350 किलोग्राम खैर लकड़ी के अवैध परिवहन के लिए NTPs/NOC में कूटरचना कर धोखाधड़ी की गई।

महासमुंद पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2) सहित अन्य संबंधित धाराओं और आर्म्स एक्ट के प्रावधानों के तहत जांच शुरू की है। इसके अलावा भारतीय वन अधिनियम की धारा 42 (1), 41(2) (ख) (घ) और 52 (1) के तहत भी कार्रवाई की जा रही है।

81 लाख की रकम पर संपत्ति कुर्की की कार्रवाई शुरू

पुलिस के अनुसार, आरोपी के घर से बरामद 81 लाख रुपये की रकम के संबंध में धारा 107 के तहत अपराध से अर्जित संपत्ति की कुर्की की कार्रवाई भी प्रारंभ की गई है। बरामद रकम को जांच के महत्वपूर्ण बिंदु के तौर पर देखा जा रहा है।

महासमुंद पुलिस की इस कार्रवाई के बाद खैर लकड़ी के कथित अवैध परिवहन और फर्जी दस्तावेजों के पूरे नेटवर्क को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि अवैध परिवहन के पीछे कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं और फर्जी NOC तैयार करने की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही।

वन विभाग की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

मामले में इतनी बड़ी मात्रा में खैर लकड़ी के कथित अवैध परिवहन को लेकर स्थानीय स्तर पर वन विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, वन विभाग की संलिप्तता के संबंध में फिलहाल कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है, तो उसके आधार पर कार्रवाई की जा सकती है।

महासमुंद पुलिस का कहना है कि वनोपज के अवैध परिवहन और धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में कार्रवाई जारी है। 81 लाख रुपये की बरामदगी के बाद अब जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है।