कोरबा: RES विभाग के उप अभियंता की लापरवाही के चलते विकास कार्य ठप, लोकार्पण के दिन आनन-फानन में शुरू हुआ बिजली का काम

Korba: Development work stalled due to negligence of the RES department's deputy engineer, electrical work started in a hurry on the day of inauguration.

कोरबा। ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग (RES) कोरबा में पदस्थ एक उप अभियंता की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अधिकारी के अड़ियल और उदासीन रवैये के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कई प्रस्तावित विकास कार्य शुरू नहीं हो सके हैं, वहीं जो कार्य शुरू हुए हैं, वे भी अधर में लटके हुए हैं। ताजा मामला बालको क्षेत्र का है, जहाँ सामुदायिक भवन के लोकार्पण के दिन आनन-फानन में बिजली का काम शुरू कराया गया, जो लोकार्पण समारोह तक भी पूरा नहीं हो सका था।
साल भर बाद भी अधूरा था विद्युतीकरण का कार्य
जानकारी के अनुसार, श्रीराम मंदिर बालको के समीप स्थित सामुदायिक भवन का निर्माण पिछले वर्ष जुलाई माह में ही पूर्ण कर लिया गया था। लगभग एक वर्ष की लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी विभाग द्वारा इस भवन में विद्युतीकरण (बिजली) का कार्य शुरू नहीं कराया गया था।
हैरानी की बात यह रही कि जब आज (23 मई 2026 को) इस भवन का लोकार्पण होना तय हुआ, तब विभाग ने आनन-फानन में विद्युत कार्य प्रारंभ कराया। इसके बावजूद लोकार्पण समारोह के समय तक भी यह कार्य पूर्ण नहीं हो पाया था।

उप अभियंता की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग कोरबा में विद्युत कार्य को संपादित करने की जिम्मेदारी उप अभियंता (Sub Engineer) राजू प्रकाश जांगड़े की है। स्थानीय सूत्रों और ठेकेदारों के अनुसार, उनकी कार्यशैली पहले से ही विवादों में रही है। आरोप है कि उप अभियंता कभी भी कार्यालय में उपस्थित नहीं मिलते हैं और न ही ठेकेदारों का फोन उठाते हैं।
छह-छह महीने लटके रहते हैं प्राक्कलन (Estimates) और मूल्यांकन
विभागीय सुस्ती का आलम यह है कि विद्युत निविदा (टेंडर) ठेकेदार को मिलने के बाद भी किसी भी कार्य का प्राक्कलन (Estimate) तैयार करने में कम से कम छह महीने का समय लगा दिया जाता है। इस दौरान ठेकेदारों से मौखिक रूप से कार्य कराया जाता है। कार्य पूर्ण होने के पश्चात भी लगभग तीन से चार महीने तक उसका मूल्यांकन (Valuation) नहीं किया जाता।
जब ठेकेदार इस संबंध में बात करने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें यह जवाब मिलता है कि अनुविभागीय अधिकारी (SDO) अवकाश पर हैं। उनके हस्ताक्षर के बाद ही मूल्यांकन भुगतान के लिए प्रस्तावित होगा। इस पूरी प्रक्रिया में अधिकारियों द्वारा महीनों का समय निकाल दिया जाता है।
बिलासपुर ऑफिस होने का हवाला, ठेकेदार परेशान
बताया जा रहा है कि अनुविभागीय अधिकारी का कार्यालय बिलासपुर में स्थित है, जिसके कारण कागजी कार्रवाई और हस्ताक्षरों में अत्यधिक देरी होती है। इस प्रशासनिक ढुलमुल रवैये के कारण ठेकेदार कुछ भी कह पाने या कर पाने की स्थिति में नहीं हैं और बुरी तरह परेशान हैं।
उप अभियंता राजू प्रकाश जांगड़े के इस कथित अड़ियल और उदासीन रवैये के चलते ग्रामीण क्षेत्रों के विकास कार्यों पर सीधा असर पड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि इस मामले के सामने आने के बाद उच्च अधिकारी इस पर क्या संज्ञान लेते हैं।