सहमति से बना शारीरिक संबंध रेप नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी युवक बरी

Consensual sex is not rape: Chhattisgarh High Court's major decision, accused youth acquitted

बिलासपुर 29 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में यौन अपराधों से जुड़े कानून की व्याख्या को स्पष्ट करते हुए कहा है कि यदि कोई महिला बालिग है, शादीशुदा है और उसकी सहमति से शारीरिक संबंध बनाए गए हैं, तो ऐसे मामले को दुष्कर्म (रेप) की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने एक आरोपी युवक को राहत देते हुए उसे दोषमुक्त कर दिया है।

यह मामला वर्ष 2022 का है, जो बेमेतरा जिले से जुड़ा हुआ है। जानकारी के अनुसार, एक शादीशुदा महिला और आरोपी युवक के बीच आपसी बातचीत होती थी और धीरे-धीरे दोनों के बीच संबंध स्थापित हो गए। बाद में महिला ने आरोप लगाया कि युवक ने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।महिला ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और कोर्ट में चालान पेश किया।

मामले की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों का अध्ययन किया। जांच में यह साबित नहीं हो पाया कि आरोपी ने महिला के साथ जबरदस्ती या दबाव में संबंध बनाए थे। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट ने आरोपी युवक को दोषमुक्त कर दिया था।

ट्रायल कोर्ट के फैसले से असंतुष्ट महिला ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोपी को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी और अपील की अनुमति मांगी। महिला का आरोप था कि उसे शादी का झांसा देकर संबंध बनाए गए, जो धोखाधड़ी और अपराध की श्रेणी में आता है।

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि महिला की सहमति दबाव, धमकी या धोखे के कारण प्राप्त की गई थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला बालिग और पहले से शादीशुदा थी, इसलिए उसकी सहमति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल आरोप के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि उसे साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य मौजूद न हों। इस आधार पर हाईकोर्ट ने महिला की याचिका को खारिज कर दिया और ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।