50 करोड़ की ठगी का मास्टरमाइंड राकेश भभूतमल जैन गिरफ्तार, 5 साल से पुलिस को दे रहा था चकमा

Rakesh Bhabhutmal Jain, the mastermind of the Rs 50 crore fraud, was arrested after eluding the police for five years.

रायपुर 12 दिसंबर 2025। छत्तीसगढ़ में करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी करके फरार चल रहे ठग राकेश भभूतमल जैन को आखिरकार पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। आरोपी पिछले 5 वर्षों से फरार था और उसके खिलाफ रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव समेत कई जिलों में कुल 12 से ज्यादा FIR दर्ज हैं। आर्थिक अपराध की गंभीर प्रकृति को देखते हुए पुलिस ने उसके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया था, साथ ही कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया था।

राकेश जैन पर आरोप है कि वह लोगों के आधार और पैन कार्ड का गलत इस्तेमाल कर कई बैंकों से लोन लेता था। फर्जी हस्ताक्षर और जाली दस्तावेजों की मदद से उसने कम से कम 5 अलग-अलग बैंकों से लाखों–करोड़ों का लोन लिया और फिर फरार हो गया।इस वजह से कई निर्दोष लोग अप्रत्याशित कर्ज और कानूनी कार्रवाई की समस्या में उलझ गए।

जानकारी के मुताबिक राकेश जैन ने शेयर मार्केट में निवेश का लालच देकर डॉक्टरों, अधिकारियों और कारोबारियों को अपना निशाना बनाया। वह लोगों को यह कहकर धोखा देता था कि वह हर महीने 10% तक का निश्चित मुनाफा दिलाएगा। शुरुआती दिनों में कुछ लाभ दिखाकर उसने भरोसा जीत लिया, जिसके बाद कई लोगों ने करोड़ों रुपए उसके भरोसे पर निवेश कर दिए।लेकिन कुछ समय बाद वह सभी निवेशकों का पैसा लेकर फरार हो गया।

अंदाजा है कि आरोपी ने विभिन्न तरीकों से 50 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी की है।रायपुर के कोतवाली, मौदहापारा और टिकरापारा थानों में उसके खिलाफ कुल 4 मामले दर्ज हैं। इसके अलावा दुर्ग, राजनांदगांव और अन्य जिलों में भी कई शिकायतें दर्ज हैं।इसके साथ ही ACB/EOW (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) में भी उसके खिलाफ मामला दर्ज था और इसी मामले में टीम ने उसे कोर्ट के आदेश पर हिरासत में लिया।

राकेश जैन लगातार ठिकाने बदलता रहता था, जिसके चलते पुलिस उसके करीब पहुंचकर भी उसे पकड़ नहीं पा रही थी। इसके बाद रायपुर पुलिस ने उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया, ताकि वह देश छोड़कर न भाग सके। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने भी मामले की निगरानी शुरू की।

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने आरोपी को कोर्ट से हिरासत में लिया है।अब संभावना है कि पुलिस उसे कोर्ट में पेश कर रिमांड की मांग कर सकती है, ताकि उससे पूछताछ कर यह पता लगाया जा सके कि ठगी की रकम उसने कहां छिपाई, कौन-कौन उसके नेटवर्क में शामिल हैं और पैसे की हेरफेर में किन-किन खातों या निवेश साधनों का इस्तेमाल किया गया।