सास-बहू और ससुर ने जगाई शिक्षा की लौ, कोरबा में उल्लास नवभारत महापरीक्षा बनी मिसाल

Mother-in-law, daughter-in-law and father-in-law ignited the flame of education, joy in Korba, Navbharat Mahapariksha became an example

कोरबा 08 दिसम्बर 2025/ उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत कोरबा जिले में आयोजित उल्लास महापरीक्षा अभियान में 15,950 से अधिक लोगों ने भाग लेकर साक्षरता की दिशा में अभूतपूर्व कदम बढ़ाया। इस महाअभियान का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को इतना सक्षम बनाना है कि वे अपना फॉर्म स्वयं भर सकें, अपना नाम खुद लिख सकें और हस्ताक्षर करने में आत्मनिर्भर बन सकें।
जिले की सभी प्राथमिक शालाओं में आयोजित इस महापरीक्षा में नवसाक्षरों ने अपने दैनिक कार्यों से समय निकालकर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक उत्साहपूर्वक परीक्षा दी। इस अभियान की विशेष बात यह रही कि सासदृबहू और ससुर एक साथ परीक्षा देने पहुंचे, जिससे शिक्षा के प्रति समाज में बढ़ती जागरूकता का अद्भुत संदेश गया। पाली विकासखंड के प्राथमिक शाला जमनीपारा में बहू संतोषी बाई, सास वृंदा बाई और ससुर भैयाराम श्याम ने एक साथ परीक्षा देकर शिक्षा का अलख जगाया। इसी तरह करतला ब्लॉक के प्राथमिक शाला मधुबनी में बापदृबेटी की प्रेरक जोड़ी देखने को मिली, जहां आशा प्रजापति ने अपने पिता पंचराम प्रजापति के साथ परीक्षा में शामिल होकर सीखने के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई। पाली ब्लॉक के उड़ता संकुल स्थित प्राथमिक शाला छिंदपानी में 86 वर्षीय अंजोरा बाई का परीक्षा में शामिल होना पूरे अभियान का प्रेरणादायी क्षण बना। वहीं पाली विकासखंड के प्राथमिक शाला नुनेरा में सास विमला बाई और बहू शकुन ने साथ में परीक्षा देकर इस अभियान को और भी प्रभावशाली बनाया।


इस महाभियान को सफल बनाने में कलेक्टर श्री अजीत वसंत, डीईओ टी.पी. उपाध्याय, जिला परियोजना अधिकारी ज्योति शर्मा, सभी बीईओ, सीएससी और बीआरसी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सभी नवसाक्षरों ने यह सिद्ध किया कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती, और साक्षर होना हर परिवार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। जिले ने वर्ष 2027 तक शत प्रतिशत साक्षरता प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है। इसी उद्देश्य से पाँचों ब्लॉकों में परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जहां विशेष रूप से वनांचल क्षेत्रों में उल्लेखनीय उत्साह देखने को मिला। यह अभियान न केवल साक्षरता की ओर बढ़ता कदम है, बल्कि समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता का उज्ज्वल उदाहरण भी है।