मवेश्यिों की मौत पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, कहा….सिर्फ योजनाएं बना रहे, जमीन पर नहीं दिख रहा बदलाव, सरकारी दावों को बताया दिखावा

The High Court made a scathing comment on the deaths of cattle, saying that only plans are being made, but no visible change is being seen on the ground, calling the government claims a sham.

बिलासपुर 20 सितंबर 2025। छत्तीसगढ़ में आये दिन सड़क दुर्घटना में हो रही मवेशियों की मौत पर तल्ख टिप्पणी की है। 16 सितंबर को 3 अलग-अलग हादसों में 17 गायों की मौत हो गई थी। इस मामले में हाईकोर्ट ने गहरी नाराजगी जताते हुए सरकार के दावे और जमीनी हकीकत में काफी अंतर होने की बात कही। हाईकोर्ट के सरकार के उस दावे को दिखावा बताया जिसमें सरकार ने 2 हजार गायों को सड़क से हटाने की बात कही थी।

छत्तीसगढ़ में गौमाता के नाम पर राजनीतिक दल और राजनेता राजनीति करने से बाज नही आते। गौमाता के संरक्षण को लेकर पिछली सरकार ने गौठानों का निर्माण कराया था। कांग्रेस सरकार की यह योजना जहां भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गयी। वहीं सूबे में सरकार बदलने के बाद भी मवेशियों के रख रखाव को लेकर कोई सुधार नही देखा जा रहा है। आलम ये है कि हर दिन प्रदेश की सड़कों पर मवेशियों के कारण सड़क दुर्घटनाएं हो रही है और मवेशियों के साथ ही आम लोगों की जाने जा रही है। पिछले दिनों 16 सितंबर को तीन अलग-अलग दुर्घटनाओं में 16 मवेशियों की मौत हो गयी थी।

जिसमें रतनपुर रोड पर ट्रक ने मवेशियों के झुंड को कुचल दिया था। इस दुर्घटना में 8 गायों की मौत हो गई। वहीं दूसरी घटना दुर्ग जिले में हुई, यहां बाफना टोल प्लाजा के पास सड़क पर बैठी 8 गायों को कंटेनर ने रौंद दिया था। सड़कों पर हो रही मवेशियों की मौत हाईकोर्ट ने एक बार फिर नाराजगी जतायी है। हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार और प्रशासन सिर्फ योजनाएं बनाकर जिम्मेदारी पूरी नहीं कर सकते। जमीन पर उसका असर भी दिखना चाहिए।

यदि सरकार और समाज मिलकर समाधान नहीं करेंगे, तो सड़कें हादसों का जाल बनी रहेंगी और लोगों व मवेशियों की मौत का सिलसिला जारी रहेगा। सड़कों पर मवेशी न हों, इसके लिए सभी स्टेकहोल्डर मिलकर काम करें। सड़क पर मवेशियों की मौतों को लेकर नाराज चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि आप वेलफेयर स्टेट हैं। आपकी जिम्मेदारी है कि पंचायत से लेकर नगर निगम और प्रशासन तक सभी मिलकर समाधान निकालें। योजनाएं और एसओपी बनाने से कुछ नहीं होगा। जब तक उनका क्रियान्वयन सख्ती से न किया जाये।