बस्तर में 108 माओवादी करेंगे आत्मसमर्पण, ‘पूना मारगेम’ पहल के तहत मुख्यधारा में वापसी

108 Maoists surrender in Bastar, return to mainstream under 'Poona Margem' initiative

जगदलपुर,11 मार्च 2026।बस्तर में माओवादी हिंसा के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच बुधवार को 108 माओवादी कैडर समाज की मुख्यधारा में लौटेंगे। ‘पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल के तहत दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) से जुड़े ये माओवादी जगदलपुर के शौर्य भवन, पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर, लालबाग में आयोजित कार्यक्रम में आत्मसमर्पण करेंगे।

इच्छामृत्यु की मांग वाली याचिका पर जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा, “ईश्वर किसी मनुष्य से यह नहीं पूछता कि वह जीवन को स्वीकार करता है या नहीं, जीवन उसे लेना ही पड़ता है, ये Henry David Thoreau के शब्द हैं, जिनका विशेष महत्व तब उभरकर सामने आता है जब अदालतों के समक्ष यह सवाल आता है कि क्या किसी व्यक्ति को मरने का विकल्प चुनने का अधिकार है। इसी संदर्भ में विलियम शेक्सपीयर का प्रसिद्ध कथन To be, or not to be अर्थात् जीना या न जीना – भी इस दार्शनिक और विधिक विमर्श को गहराई प्रदान करता है।”

इस फैसले से पहले कोर्ट ने उनके परिवार से भी बातचीत की थी। हरीश के माता-पिता, जिन्होंने 100% दिव्यांग हो चुके बेटे के ठीक होने की उम्मीद छोड़ दी थी, ने ही सुप्रीम कोर्ट में उनकी इच्छामृत्यु की मांग की थी।